यह बदलता मौसम बच्चों पर भारी पड़ रहा है! दिल्ली-एनसीआर में बच्चों की ओपीडी में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मशहूर चाइल्ड स्पेशलिस्ट का कहना है, खांसी-जुकाम में तुरंत दवाई देना नुकसानदेह हो सकता है! आखिर क्यों 3 से 4 दिन दवा से दूर रहने की सलाह दी जा रही है? पूरी वजह जानकर माता-पिता रह जाएंगे हैरान.
दिल्ली: उत्तर भारत में इस समय लगातार मौसम बदलता जा रहा है. कभी थोड़ी ठंड होती है तो कभी अचानक लोगों को गर्मी का एहसास होता है. इसी के चलते कहीं बुजुर्ग लोग बीमार भी पड़ रहे हैं, लेकिन इस समय खासकर नवजात और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं. तभी यह भी देखने को मिला है कि इस बार उत्तर भारत के गवर्नमेंट और प्राइवेट हॉस्पिटलों में बच्चों की ओपीडी में 20% से 30% की बढ़ोतरी हुई है. इस विषय पर जब दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रसिद्ध चाइल्ड स्पेशलिस्ट और न्यूबॉर्न स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह ने कुछ अहम बातें बताईं है .
इस समय उत्तर भारत का मौसम जिस तरह से हल्का-हल्का रोज बदलते जा रहा है. उससे बड़े-बूढ़े तो बीमार हो ही रहे हैं लेकिन उससे छोटे बच्चे और नवजात बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं. डॉक्टर का कहना है कि जहां वायरस तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है वहीं सबसे ज्यादा बच्चे खांसी और जुकाम से परेशान हो रहे हैं.
दवाई न देने के पीछे तर्क
लेकिन इसके बाद उन्होंने सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात कही. उनका कहना था कि चाहे बच्चे इस वक्त खांसी और जुकाम से दो-चार हो रहे हों, लेकिन उनकी सलाह माता-पिता को यही है कि तीन से चार दिन तक यदि बच्चों में कोई भी ज्यादा तकलीफ नहीं है और केवल खांसी और जुकाम ही है, और वह खांसी और जुकाम उन्हें ज्यादा परेशान नहीं कर रहा है, तो वे बच्चों को किसी भी तरह की कोई भी दवाई न दें. इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में और भारत में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की यही गाइडलाइंस हैं कि यदि बच्चे मौसम खराब होने की वजह से वायरस की चपेट में आते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द दवाई देना शुरू नहीं करनी चाहिए. थोड़े दिन तक इंतजार करना चाहिए. यदि उनमें किसी भी तरह का कोई भी बड़ा खतरनाक लक्षण नहीं है, तो वह वायरल अपनी समय सीमा पूरी करके खुद ही समाप्त हो जाएगा.
किस बात का रखना होगा ख्याल
गाइडलाइंस सीधा कहती हैं कि बच्चों को तुरंत दवाई देना इसलिए शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि वायरल जैसी चीज जाने में एक समय लेती हैं. यदि आप दवाइयां भी देंगे, तो वे अपने निर्धारित समय को पूरा करके ही शरीर से जाएगी. इसके गाइडलाइंस में यह भी कहा कि दवाइयां न देने का मतलब यह नहीं है कि माता-पिता बिल्कुल ध्यान देना बंद कर दें. उन्हें यह जरूर देखना है कि वायरल से बच्चे को किसी तरह की ज्यादा तकलीफ तो नहीं हो रही है और यदि हो रही है तो उन्हें बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर जरूर जाना चाहिए. लेकिन यदि कोई ज्यादा तकलीफ नहीं है तो वे घर में बच्चों को भाप भी दे सकते हैं और नोजल ड्रॉप्स भी बच्चों की नाक में डाल सकते हैं. इसके अलावा उन्हें बच्चों को घर में एक तरह के सामान्य तापमान में रखना चाहिए.


