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राहुल गांधी की भारत विरोधियों संग मिलीभगत,चुनाव लड़ने पर आजीवन लगे रोक’: निशिकांत दुबे

राहुल गांधी की भारत विरोधियों संग मिलीभगत,चुनाव लड़ने पर आजीवन लगे रोक’: निशिकांत दुबे


कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी विभिन्‍न मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हैं. उन्‍होंने सरकार पर कई तरह के गंभीर आरोप भी लगाए हैं. सत्‍ता पक्ष की तरफ से इसपर कड़ा ऐतराज जताया गया है. अब भाजपा सांसद ने राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में प्रस्‍ताव लाने की बात कही है.

संसद का इस बार का बजट सत्र अभी तक काफी हंगामेदार और सनसनीखेज रहा है. अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक प्रस्‍ताव लाने का नोटिस दिया है. भाजपा सांसद ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका भारत विरोधी तत्‍वों के साथ मिलिभगत है. ऐसे में न केवल उनकी लोकसभा सदस्‍यता रद्द की जानी चाहिए, बल्कि कांग्रेस सांसद को आजीवन चुनाव लड़ने से भी रोका जाए.


भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार 12 फरवरी 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ‘सब्सटेंटिव मोशन’ लाने का नोटिस दिया और उनकी संसद सदस्यता रद्द करने के साथ ही आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की है. संसद परिसर में भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने अपने नोटिस में राहुल गांधी के विदेशी दौरों और कथित रूप से सोरोस फाउंडेशन, यूएसएआईडी और फोर्ड फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से जुड़े लोगों के साथ संपर्क का उल्लेख किया है. दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों की यात्राओं के दौरान ‘भारत विरोधी तत्वों’ के साथ मिलीभगत करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर प्रस्ताव यानी सब्सटेंटिव मोशन है, जिसका उद्देश्य सदन के समक्ष निर्णय या राय व्यक्त करना होता है.

क्‍या बोले निशिकांत दुबे?
भाजपा सांसद ने कहा, ‘मैंने सब्सटेंटिव मोशन का नोटिस दिया है, जिसमें राहुल गांधी की गतिविधियों और विदेशी संगठनों से कथित संबंधों का उल्लेख है. इसके आधार पर उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द की जानी चाहिए और उन्हें जीवनभर चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए.’ कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं, राजनीतिक हलकों में इस कदम को संसद में जारी सियासी टकराव के नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है. विपक्षी दलों ने पहले भी आरोप लगाया है कि सरकार असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में जवाबदेही जरूरी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्पीकर और सदन इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इसे आगे की कार्यवाही के लिए स्वीकार किया जाता है या नहीं.

लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को पूरी तरह आत्मसमर्पण करार देते हुए आरोप लगाया कि इस डील के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका के हवाले कर दी गई है और किसानों के हितों से समझौता किया गया है. राहुल गांधी ने कहा कि इस समझौते के तहत भारतीय हितों को भाजपा की फाइनेंशियल स्‍ट्रक्‍चर बचाने के लिए गिरवी रख दिया गया. उन्होंने मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले पकड़ बनाई जाती है, फिर गला दबाया जाता है और अंत में सामने वाला हार मान लेता है.

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