केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत हिरासत का बचाव किया. केंद्र ने लद्दाख में उनके बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया. वांगचुक को पिछले साल सितंबर में हिरासत में लिया गया था. वह अभी जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं.
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने का बचाव किया, और तर्क दिया कि उनके बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा थे. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.
सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके “ज़हर फैलाने” की इजाज़त नहीं दी जा सकती, खासकर लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में, जो देश की रक्षा और सीमा पर तैनात सेनाओं के लिए सप्लाई चेन के लिए बहुत ज़रूरी है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस इलाके को ठप होने से रोकना बहुत ज़रूरी है.
केंद्र सरकार ने वांगचुक के उन बयानों पर सवाल उठाया जिनमें उन्होंने दावा किया था कि हर इलाके को यह तय करने का अधिकार है कि वह किससे संबंधित है और उन्होंने जनमत संग्रह और रेफरेंडम की वकालत की थी. मेहता ने पूछा कि क्या ऐसे बयान NSA लगाने के लिए सही मामला नहीं बनाते?
सितंबर 2025 में हिरासत में लिए गए थे सोनम वांगचुक
लद्दाख प्रशासन ने अपने हलफनामे में कहा था कि वांगचुक की कथित तौर पर लेह में अशांति फैलाने में भूमिका को देखते हुए उनकी हिरासत उचित थी. प्रशासन ने यह भी कहा है कि हिरासत के कारणों की जानकारी कानून द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर विधिवत दे दी गई थी और हिरासत सलाहकार बोर्ड ने बाद में इस निर्णय की पुष्टि की. वांगचुक की हिरासत का आदेश 26 सितंबर, 2025 को पारित किया गया था और बाद में उन्हें राजस्थान के जोधपुर केंद्रीय जेल में ट्रांसफर कर दिया गया.


