Awaaz India Tv

‘जाति पूछकर रूम देते हैं…’, UGC नियमों पर स्टे के बाद विद्यार्थियों ने बताई जमीनी सच्चाई

‘जाति पूछकर रूम देते हैं…’, UGC नियमों पर स्टे के बाद विद्यार्थियों ने बताई जमीनी सच्चाई

सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए नियम पर रोक लगने के बाद इसका असर सोशल मीडिया पर भी साफ दिखाई दिया. किसी ने कोर्ट के फैसले को सही बताया, तो कई लोग इसके लोग इसके विरोध में अपनी बात रखते नजर आए. कुल मिलाकर बहस तेज हो गई है. आइए देखते हैं, इस फैसले पर किसने क्या कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के उन नए नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लागू करना बताया गया था. अदालत ने कहा कि इन रेग्युलेशनों में ऐसे कई अहम मुद्दे हैं जिन्हें ठीक से समझना जरूरी है. अगर इन्हें बिना पूरी जांच-पड़ताल के लागू कर दिया गया, तो इसका असर बहुत दूर तक जा सकता है और समाज में अनचाही खाई भी पैदा हो सकती है

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नियमों के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है. अदालत ने साफ दिया कि वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित यह रेग्युलेशन फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा.

पिछले कुछ हफ्तों में देश के कई हिस्सों में इन नियमों को लेकर विरोध बढ़ गया था. कई यूनिवर्सिटी परिसरों में छात्रों ने चिंता जताई कि नई व्यवस्था से नए तरह की असमानता पैदा हो सकती है. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लंबी बहस चली, जिसमें सबसे ज़्यादा आपत्ति सामान्य वर्ग के छात्रों और अभिभावकों की तरफ से देखने को मिली.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा कि लोग इस रोक को किस रूप में देख रहे हैं. इस बहस में कवि कुमार विश्वास भी जुड़े. उन्होंने दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्र की एक कविता की पंक्तियां साझा करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. अपने नए बयान में कुमार विश्वास ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के कदम का स्वागत करते हैं, क्योंकि मौजूदा समय में देश किसी भी तरह के सामाजिक विभाजन को सहन करने की स्थिति में नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी नीतियाँ बनाएं जो समाज को जोड़ने में मदद करें.

गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अदालत के फैसले को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि यह निर्णय कई लोगों की चिंता को कम करता है. इससे पहले वे एक वीडियो संदेश प्रधानमंत्री से इस मामले पर हस्तक्षेप करने की अपील भी कर चुके थे.

हालांकि सभी लोग इस रोक से संतुष्ट नहीं हैं. कुछ समूह, विशेषकर OBC, SC और ST समुदाय से जुड़े कार्यकर्ता, इसे “राजनीतिक खेल” बता रहे हैं. उनका कहना है है कि कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि अदालत ने सिर्फ अस्थायी रोक लगाई है, अंतिम फैसला अभी बाकी है. इस बीच, लल्लनटॉप की टीम प्रयागराज पहुंची और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों से बात की. कई छात्रों ने कहा कि उनके लिए कैंपस में जाति आधारित भेदभाव कोई नई बात नहीं है और नए नियमों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी थी. उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों में बराबरी और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए बातचीत और पारदर्शी नीतियों की जरूरत है.

‘जाति देखकर दिये जाते हैं रूम’
UGC नियमों पर बात करते हुए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने बताया कि उसके दोस्त ने कैंपस में किस तरह का भेदभाव झेला। विद्यार्थियों ने बताया कि यहाँ काफी बार जाति देखकर रूम दिए जाते हैं.मुस्लमान विद्यार्थियों को रूम मिलना मुश्किल होता है. कुछ छात्रों ने UGC के नए नियमों का समर्थन भी किया.अभी अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है, लेकिन इस रोक ने बहस को एक नई दिशा दे दी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में सरकार और यूजीसी इस इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं  और छात्र समुदाय इस बहस को किस दिशा में ले जाता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *