राष्ट्रनिर्माता डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने अपने 5 लाख अनुयायियों के साथ 14 अक्टूबर 1956 दीक्षाभूमि में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी. देश-विदेश के लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय श्रद्धास्थान है. प्रति वर्ष 50 लाख से अधिक लोग दीक्षाभूमि के भेट देकर यहां से मानवता का संदेश लेकर जाते है. लेकिन विगत कुछ सालों से दीक्षाभूमि का विकास कार्य ठप्प है. इस बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच में सुनवाई हुई. वैसे विगत 2 सालों से कोर्ट में तारीख पे तारीख जारी है.
सुनवाई के दरम्यान सामाजिक न्याय विभाग ने जानकारी देते हुए कहा की दीक्षाभूमि का विकास सिंगापुर व दुबई की तर्ज पर किया जाएगा. इसके लिए ग्लोबल टेंडर निकाला जा रहा है. सामाजिक न्याय व विशेष सहाय विभाग ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में प्रस्तुत प्रतिज्ञापत्र में दिया है. 13 दिसंबर 2025 को सामाजिक न्याय मंत्री संजय सिरसाट की उपस्थिति में सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक हुई. इस दौरान सिरसाट ने दीक्षाभूमि को सिंगापुर व दुबई की तर्ज पर विकसित करने के निर्देश दिए थे.

भूमिगत पार्किंग के निर्माण काम का विरोध होने पर प्रकल्प
सलाहगार मे डिजाइन एसोसिएट्स इनकॉपोर्रेशन ने भूमिगत काम को अलग रखकर अन्य विकास कामों के चार प्रारूप तैयार किए थे. परमपूज्य डॉ. बाबासाहब आंबेडकर स्मारक समिति ने चार प्रारूपों में से तीसरे नंबर के प्रारुप को स्वीकृती दी. जिसके बाद नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने उपरोक्त प्रारूप सामाजिक न्याय विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है. इसे हरी झंडी मिलने के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा. न्यायालय को बताया गया कि अंतिम प्रारूप तैयार करने के लिए तीन महिने का समय लगेगा.
काम का समयबद्ध कार्यक्रम मांगा
दीक्षाभूमि के विकास के लिए एड. शैलेष नारनवरे ने जनहित याचिका दायर की है. इस याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्तिद्वय अनिल किलोर व राज वाकोडे की अदालत के समक्ष सुनवाई हुई. इसके बाद न्यायालय ने सामाजिक न्याय विभाग का प्रतिज्ञापत्र रिकॉर्ड पर लेकर दीक्षाभूमि विकास के लिए कौनसे काम कितने समय में पूरे किए जाएंगे, इसका समयबद्ध कार्यक्रम आगामी मंगलवार तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.


