इंडिया के डायमंड स्टेट्स समिट में राव नरबीर सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार अरावली के लिए ग्रीन वॉल बनाएगी और इस मुद्दे पर गंभीर है. राव नरबीर सिंह ने कहा कि अरावरी से सटे तीन जिलों में खनन को मंजूरी नहीं है. पॉल्युशन को लेकर भी मंत्री ने अपनी राय रखी और लोगों की भूमिका को अहम बताया.
चंडीगढ़.: इंडिया की ओर से शुक्रवार को आयोजित ‘डायमंड स्टेट्स समिट में हरियाणा’ के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने अरावली के मुद्दे पर अहम बयान दिया. उद्योग मंत्री ने सम्मिट में बताया कि हरियाणा सरकार अरावली के मुद्दे पर गंभीर है और इसके लिए एक ग्रीन वॉल बनाएंगी. अरावली सरंक्षण के लिए उन्होंने कहा कि अरावली को लेकर एक कानून आ गया और लोगों को दिक्कतें आईं और लगा कि अरावली खत्म हो जाएगी, जबकि सरकार की ऐसी मंशा नहीं है और सरकार आम आदमी के हितों की रक्षा करेगी. मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाई है. यदि अरावली को नुकसान पहुंचेगा तो दिल्ली में बैठे अफसर भी कहां बचेंगे. सरकार इस पर ध्यान दे रही है.

राव नरबीर सिंह ने कहा कि अरावली की सीमा से हरियाणा के सात जिले लगते हैं और चार जिलों में तो खनन को मंजूरी ही नहीं दी गई है. केवल महेंद्रगढ़, दादरी और भिवानी में ही खनन को मंजूरी दी गई है. अरावली को लेकर कांग्रेस नेता सुरजेवाला के आरोपों पर उन्होंने कहा कि फरीदाबाद, गुरुग्राम, मेवात और रेवाड़ी में 2003 से कोई भी खनन नहीं होता है और यह बैन है.
प्रदूषण को लेकर वह कहते हैं कि लोगों की भूमिका भी अहम रहती है. वह दिल्ली सरकार से भी बात कर रहे हैं. सबसे अधिक पॉल्युशन सिंगल यूज प्लास्टिक से होता है. एक छोटे से बैग को खत्म होने में साढ़े चार सौ साल लगते हैं. दुकान में यह मिल रहा है, जबकि सरकार की तरफ से यह बैन है. वह कहते हैं कि पर्यावरण मंत्रालय भी उनके पास है और उन्होंने विभाग को कहा कि यदि अन्य तरीके से थैले बनाए जाएंगे तो वह सबसिडी भी देंगे.
उद्योगों को लेकर क्या बोले
इंडस्ट्री के आने पर पॉल्युशन बढ़ने के सवाल पर राव नरबीर कहते हैं कि जो उद्योग रेड जोन में आते हैं, उन्हें दिल्ली एनसीआर में परमिशन नहीं मिलती है. ज्यादा पॉल्युलन फैलाने वाले उद्योगों के चालान भी काटे जाते हैं. यमुना को साफ करने के लिए भी इंतजाम करेंगे और पांच साल में बदलाव दिखेगा. वह बताते हैं कि जल्द ही हरियाणा में तीन लाख से पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश हरियाणा में किया जाएगा. जितनी सब्सिडी हमारी सरकारी दे रही है, उतना कहीं भी दूसरे राज्य में नहीं दी जा रही है. उद्योग मालिकों को सबसे अधिक जमीन की कीमत देनी पड़ती है


