अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ट्रम्प ने कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
ट्रम्प ने बताया कि इस मुद्दे पर NATO चीफ मार्क रुटे से उनकी फोन पर बहुत अच्छी बातचीत हुई है। बातचीत के बाद अलग-अलग पक्षों के साथ स्विट्जरलैंड के दावोस में बैठक करने पर सहमति बनी है। ट्रम्प ने अमेरिका को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बताया। उन्होंने कहा कि ताकत के जरिए ही दुनिया में शांति कायम की जा सकती है और यह क्षमता सिर्फ अमेरिका के पास है।
अमेरिका ने ग्रीनलैंड में मिलिट्री एयरक्राफ्ट भेजा
ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर डेनमार्क से बढ़ते विवाद के बीच अमेरिका ने नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड भेजा है। यह विमान जल्द ही पिटुफिक स्पेस बेस पहुंचेगा। NORAD ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह तैनाती पहले से तय सैन्य गतिविधियों के तहत की जा रही है। कमांड ने साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी डेनमार्क और ग्रीनलैंड को दी गई है।
ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के बीच डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को कई विमान डेनमार्क के सैनिकों और सैन्य उपकरणों को लेकर ग्रीनलैंड पहुंचे।
ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर सैनिकों के तैनाती की संभावना
डेनमार्क पहले से ग्रीनलैंड में करीब 200 सैनिक तैनात किए हुए है। इसके अलावा 14 सदस्यीय सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी वहां मौजूद है, जो आर्कटिक इलाकों में गश्त करते हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इन्हें जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मजबूत किया जाएगा। यह संख्या छोटी है, लेकिन यह राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि NATO एकजुट है।
डेनमार्क की अगुआई में चल रहा ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस एक सैन्य अभ्यास है। इसका मकसद यह देखना है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात करने पड़े, तो उसकी तैयारी कैसी होगी। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस अभ्यास का फोकस आर्कटिक इलाके में सहयोगी देशों के बीच तालमेल और काम करने की क्षमता बढ़ाने पर है।
आगे चलकर इससे भी बड़ा मिशन लाने की योजना है, जिसे ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री कहा जा रहा है। यह एक नाटो मिशन होगा। इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड और उसके आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाना और किसी भी खतरे का सैन्य जवाब देने की ताकत मजबूत करना है।
हालांकि यह मिशन तुरंत शुरू नहीं होगा। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक, ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री को शुरू होने में अभी कई महीने लग सकते हैं। यानी फिलहाल ग्रीनलैंड में कोई बड़ा नया सैन्य मिशन शुरू नहीं हुआ है, बल्कि उसकी तैयारी और योजना पर काम चल रहा है।


