रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने डोनाल्ड ट्रंप को वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार देने पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। एकेडमी ने कहा है कि इस पुरस्कार को न तो शेयर किया जा सकता है और ना ही ट्रांसफर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे विजेता का नाम नहीं बदलेगा।
कोपेनहेगन: वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट करने पर रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एकेडमी ने कहा है कि नोबेल पुरस्कार और पुरस्कार विजेता अविभाज्य हैं। इन्हें बांटा नहीं जा सकता। एकेडमी ने यह भी कहा कि पदक या डिप्लोमा भले ही किसी और के पास चला जाए, लेकिन इससे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का नाम नहीं बदलता है। बता दें कि ट्रंप ने 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार पाने के लिए जबरदस्त लॉबिंग की थी, लेकिन यह कोरिना मचाडो को मिला था।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने क्या कहा
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने एक बयान जारी कर कहा, “नोबेल शांति पुरस्कार विजेता को पुरस्कार के दो प्रमुख प्रतीक प्राप्त होते हैं: एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा। इसके अतिरिक्त, पुरस्कार राशि अलग से प्रदान की जाती है। पदक, डिप्लोमा या पुरस्कार राशि का चाहे जो भी हाल हो, इतिहास में पुरस्कार प्राप्तकर्ता के रूप में मूल विजेता का ही नाम दर्ज रहता है। भले ही पदक या डिप्लोमा बाद में किसी और के पास चला जाए, इससे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का नाम नहीं बदलता।”
नोबेल पुरस्कार शेयर/ट्रांसफर नहीं कर सकते
बयान में आगे कहा गया, “पुरस्कार विजेता न तो इसे किसी और के साथ शेयर कर सकता है और न ही घोषणा होने के बाद इसे किसी और को ट्रांसफर कर सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार कभी रद्द नहीं किया जा सकता। यह निर्णय अंतिम है और सर्वकालिक लागू होता है। नॉर्वे की नोबेल समिति शांति पुरस्कार विजेताओं या उनके द्वारा की जा रही राजनीतिक प्रक्रियाओं पर दिन-प्रतिदिन टिप्पणी करना अपना कर्तव्य नहीं मानती है। यह पुरस्कार समिति के निर्णय लेने के समय तक विजेता के योगदान के आधार पर दिया जाता है।”
नोबेल पुरस्कार विजेता बेचने/दान देने के लिए स्वतंत्र
एकेडमी ने कहा, “समिति पुरस्कार विजेताओं के बाद के कथनों, निर्णयों या कार्यों पर कोई टिप्पणी नहीं करती है। पुरस्कार विजेताओं द्वारा किए गए किसी भी वर्तमान मूल्यांकन या विकल्पों को उनकी स्वयं की जिम्मेदारी समझा जाना चाहिए। नोबेल फाउंडेशन के नियमों में इस बात पर कोई प्रतिबंध नहीं है कि पुरस्कार विजेता पदक, डिप्लोमा या पुरस्कार राशि का क्या कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि पुरस्कार विजेता इन वस्तुओं को अपने पास रखने, देने, बेचने या दान करने के लिए स्वतंत्र है। विश्वभर के संग्रहालयों में कई नोबेल पदक प्रदर्शित हैं। कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने अपने पदक दान करने या बेचने का विकल्प भी चुना है।”
नोबेल पुरस्कार दान देने/बेचने वाले विजेता
कोफी अन्नान (शांति पुरस्कार 2001): फरवरी 2024 में, उनकी पत्नी नैन अन्नान ने पदक और डिप्लोमा दोनों को जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को दान कर दिया, जहां अब वे स्थायी रूप से प्रदर्शित हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।
क्रिश्चियन लुस लैंग (शांति पुरस्कार 1921): नॉर्वे के पहले नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का पदक 2005 से लैंग परिवार द्वारा ओस्लो के नोबेल शांति केंद्र को दीर्घकालिक ऋण पर दिया गया है। यह अब पदक कक्ष में प्रदर्शित है और नॉर्वे में जनता के लिए स्थायी रूप से प्रदर्शित एकमात्र मूल शांति पुरस्कार पदक है।


