ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुए सड़क हादसे के बाद दलदल में डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें दम घुटने को मौत का कारण बताया गया है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, युवराज के फेफड़ों में पानी भर गया था। उनके फेफड़ों में 200 मिलीलीटर पानी पाया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि डूबने और दम घुटने के कारण उनकी मृत्यु हुई।
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुए सड़क हादसे के बाद दलदल में डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें दम घुटने को मौत का कारण बताया गया है।पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, युवराज के फेफड़ों में पानी भर गया था। उनके फेफड़ों में 200 मिलीलीटर पानी पाया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि डूबने और दम घुटने के कारण उनकी मृत्यु हुई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि युवराज काफी देर तक पानी में डूबे रहे, जिसके कारण उनके फेफड़ों में पानी भर गया। पानी भरने से उनका दम घुट गया और इसी दौरान हार्ट फेलियर भी हो गया। हादसे के बाद से युवराज की गाड़ी अभी तक गड्ढे से नहीं निकाली जा सकी है। प्राधिकरण द्वारा पहले बेसमेंट से पानी निकालने के लिए पंप लगाए जाएंगे, जिसके बाद पुलिस गाड़ी को बाहर निकालेगी।
सेक्टर-150 में हुए हादसे के तीन दिन बाद भी नोएडा प्राधिकरण को ये नहीं पता चल सका कि जिस प्लाट पर घटना हुई वो किसका है। इस मामले की जांच के लिए एक समिति बना दी गई है।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि एससी-02, सेक्टर-150 भूखंड लोटस ग्रीन को आवंटित किया गया था। प्राधिकरण से भूखंड लेने के बाद लोटस बिल्डर ने इस भूखंड को छोटे-छोटे हिस्सों में दूसरे बिल्डरों को बेच मुनाफा कमा लिया। अब जिस भूखंड पर यह हादसा हुआ है, यह भूखंड लोटस ग्रीन ने किस बिल्डर को बेचा था, यह जानकारी अभी तक नोएडा प्राधिकरण के अफसरों को नहीं है।
जांच के लिए बनाई गई समिति
इस बारे में नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल का कहना है कि जिस भूखंड पर यह हादसा हुआ, वह किसका है अभी जानकारी नहीं है। भूखंड आवंटी का पता करने, कब आवंटित हुआ था, कब नक्शा पास हुआ था, निर्माण नहीं करने पर प्राधिकरण स्तर से क्या-क्या कार्रवाई की गई समेत अन्य बिंदुओं पर जांच के लिए एक समिति बना दी गई है। समिति की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
13.29 लाख वर्गमीटर का है भूखंड
यह भूखंड 13 लाख 29 हजार वर्ग मीटर का है। साल 2014 में आवंटन के बाद इस भूखंड के 24 सब डिवीजन हुए थे। अलग-अलग बिल्डरों ने काम भी शुरू किया फिर पूरी स्पोर्ट्स सिटी फंसने और आपसी विवाद में कई बिल्डर काम बंद कर चले गए। हालांकि इसी डिवीजन में तीन बिल्डरों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राहत दी थी। जिसके तहत वो अपने नक्शे प्राधिकरण से पास करवाकर निर्माण शुरू कर सकते है।


