Awaaz India Tv

गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए डोनाल्‍ड ट्रंप का भारत को न्योता

गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए डोनाल्‍ड ट्रंप का भारत को न्योता

अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का न्योता दिया. खुद भारत में अमेर‍िकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की और बताया क‍ि ट्रंप ने पीएम मोदी को खत ल‍िखा है. भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई आध‍िकार‍िक प्रत‍िक्रिया नहीं दी है.

नई दिल्ली/वॉशिंगटनः मिड‍िल ईस्‍ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपने महत्वाकांक्षी ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का आधिकारिक न्योता दिया है. यह बोर्ड युद्ध से तबाह हो चुके गाजा में शासन व्यवस्था और पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा. भारत में अमेर‍िका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया में शेयर की है. हालांक‍ि, भारत सरकार की ओर से इस पर कोई प्रत‍िक्रिया नहीं आई है.

व्हाइट हाउस के अनुसार, यह पहल ट्रंप के ’20-प्‍वाइंट पीस प्‍लान’ का हिस्सा है, जिसका गठन 15 जनवरी को किया गया था. इस योजना के तहत तीन प्रमुख ब्‍लाक होंगे. मेन बोर्ड ज‍िसकी अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे. फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स की समिति बनेगी जो गाजा के स्थानीय प्रशासन को चलाएगी. और एक्जीक्यूटिव बोर्ड होगा, जो पुनर्निर्माण और स्थिरता पर ध्यान देगा. सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इस मॉडल को केवल गाजा तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि भविष्य में दुनिया के अन्य संघर्षों को सुलझाने के लिए भी इसे एक ढांचे के रूप में देख रहे हैं.

भारत ही क्यों?
भारत को इस बोर्ड में शामिल करने के पीछे सबसे बड़ी वजह उसकी ‘विश्वसनीयता’ है. भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है जिसके संबंध इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों के साथ ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं. भारत और इजरायल के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है. रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं. भारत ने हमेशा फिलिस्तीन के लोगों के कल्याण का समर्थन किया है. संघर्ष शुरू होने के बाद भारत उन पहले देशों में शामिल था, जिसने मिस्र के रास्ते गाजा को मानवीय सहायता दवाइयां, भोजन, राहत सामग्री भेजी थी. यही संतुलन भारत को एक आदर्श मध्यस्थ और पर्यवेक्षक बनाता है, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकते हैं.

पाकिस्तान को भी न्योता, लेकिन इजरायल ने लगाया ‘वीटो’
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसे भी ट्रंप की ओर से ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. हालांकि, पाकिस्तान की राह में इजरायल सबसे बड़ा रोड़ा है. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार (Reuven Azar) ने स्पष्ट कर दिया था कि इजरायल को गाजा के भविष्य के लिए पाकिस्तान की कोई भी भूमिका स्वीकार नहीं होगी. इजरायल का मानना है कि पाकिस्तान की कट्टरपंथी छवि और हमास के प्रति उसका नरम रुख उसे शांति प्रक्रिया के लिए अयोग्य बनाता है. ऐसे में, भले ही अमेरिका ने न्योता भेजा हो, लेकिन जमीन पर इजरायल के विरोध के कारण पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *