सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दिया. ये वो लोग हैं, जिनके नाम थोड़ी गड़बड़ी की वजह से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया, कोर्ट ने ECI की व्हाट्सऐप कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR में 1.25 करोड़ वोटरों की सूची सार्वजनिक करने का आदेश दिया. ये वो लोग हैं, जिनके नाम थोड़ी गड़बड़ी की वजह से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया, कोर्ट ने ECI की व्हाट्सऐप कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
अगर आपका भी नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है, तो उसकी एक अलग लिस्ट आएगी. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर सोमवार को बड़ा आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह उन 1.25 करोड़ वोटरों की लिस्ट सार्वजनिक करे, जिनके नामों में लॉजिकल गड़बड़ी बताकर आपत्ति जताई गई है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए करीब 2 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. इसमें से बड़ी संख्या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ कैटेगरी की है.
कोर्ट के प्रमुख आदेश और निर्देश
लिस्ट सार्वजनिक करें: कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के नाम में गड़बड़ी (जैसे- पिता के नाम में त्रुटि, माता-पिता या दादा-दादी की उम्र में तार्किक अंतर न होना) पाई गई है, उनकी लिस्ट ग्राम पंचायतों, ब्लॉक ऑफिस और वार्ड ऑफिस में चस्पा की जाए.
10 दिन का समय: लिस्ट जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोगों को 10 दिनों का समय दिया जाए.
सुनवाई का मौका: अगर किसी के डॉक्यूमेंट्स संतोषजनक नहीं हैं, तो उन्हें नए दस्तावेज पेश करने और अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा. अधिकारी जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स की रसीद देंगे.
फैसले की वजह: अगर किसी का नाम लिस्ट से हटाया जाता है या आपत्ति बरकरार रहती है, तो अंतिम फैसले में उसका कारण बताना अनिवार्य होगा.
व्हाट्सऐप से सरकार नहीं चलती : सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. जब यह बात सामने आई कि ECI आधिकारिक सर्कुलर की जगह WhatsApp के जरिए निर्देश भेज रहा है, तो CJI सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, व्हाट्सऐप के जरिए सब कुछ चलाने का कोई सवाल ही नहीं है. इसके लिए प्रॉपर सर्कुलर जारी करना होगा.
बाल विवाह और नोबेल विजेता का जिक्र
उम्र का अंतर: ECI के वकील राकेश द्विवेदी ने तर्क दिया कि कई मामलों में मां और बेटे की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर है, जो गड़बड़ी है. इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, “मां-बेटे की उम्र में 15 साल का अंतर लॉजिकल गड़बड़ी कैसे हो सकता है? हम ऐसे देश में नहीं हैं जहां बाल विवाह हकीकत न हो.”
सरनेम की स्पेलिंग: सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि बंगाल में ‘गांगुली’ या ‘दत्ता’ जैसे सरनेम की स्पेलिंग अलग-अलग लिखी जाती है. इसे आधार बनाकर नाम हटाना गलत है.
अमर्त्य सेन को नोटिस: कोर्ट को बताया गया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया है. वकीलों ने आरोप लगाया कि आयोग ‘एल्गोरिदम’ के आधार पर काम कर रहा है, जिससे 324 लोगों को एक ही व्यक्ति से जोड़ने जैसी तकनीकी खामियां हो रही हैं.
कोर्ट ने राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुनवाई केंद्रों पर पर्याप्त मैनपावर सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है. बेंच ने यह भी कहा कि 1 करोड़ से ज्यादा लोग इस प्रक्रिया से तनाव में हैं, इसलिए जहां भी जरूरत होगी, कोर्ट दखल देगा.


