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2027 की जनगणना में पहली बार पूछे जाएंगे ये सवाल, जानिए…..

2027 की जनगणना में पहली बार पूछे जाएंगे ये सवाल, जानिए…..

जनगणना 2027 में पहली बार लोगों के खानपान की जानकारी जुटाई जाएगी, जिससे राशन वितरण और पोषण कार्यक्रमों को बेहतर बनाया जा सके। यह डिजिटल जनगणना तीन चरणों में होगी, जिसमें भवन, परिवार और व्यक्तिगत जानकारी शामिल है। उत्तर प्रदेश में तैयारियां तेज हैं, जिसमें पांच लाख से अधिक कर्मचारी शामिल होंगे। दूसरे चरण में जाति संबंधी जानकारी भी पूछी जाएगी।

लखनऊ। वर्ष 2011 के बाद देश एक बार फिर अपनी सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को दर्ज करने की तैयारी में है। जनगणना 2027 सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह बताएगी कि भारत क्या खाता है, कैसे रहता है और किस दिशा में बदल रहा है। पहली बार जनगणना में लोगों की खानपान की पसंद को भी शामिल किया जा रहा है।

हर घर से यह पूछा जाएगा कि उनकी थाली में सबसे ज्यादा कौन-सा अनाज है? चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का या कोई अन्य। उद्देश्य यह है कि क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से भविष्य की योजनाओं, खासकर राशन वितरण और पोषण कार्यक्रमों को ज्यादा प्रभावी बनाना जा सके।

प्रदेश में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। जिला स्तर पर समितियों का गठन कर दिया गया है और डिजिटल जनगणना के लिए रिहर्सल भी शुरू हो चुका है। बहराइच के मिहींपुरवा, बुलंदशहर के अनूपशहर और प्रयागराज के कुछ नगरीय क्षेत्रों में मोबाइल एप के जरिये अभ्यास किया गया है, ताकि असली गणना में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

प्रदेश में जनगणना तीन चरणों में होगी। पहले चरण में 20 मई से 20 जून के बीच भवन और परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी। प्रगणक मोबाइल एप के माध्यम से 32 से अधिक सवाल पूछेंगे।

इनमें भवन नंबर, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, कच्चा या पक्का मकान, मकान का स्वामित्व, पेयजल का स्रोत, बिजली, शौचालय, गंदे पानी की निकासी, स्नान की सुविधा, रसोई में एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, मोबाइल, साइकिल, स्कूटर और कार जैसी सुविधाओं की जानकारी शामिल है। इसी चरण में परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज के बारे में भी सवाल पूछा जाएगा।

पांच लाख से ज्यादा कर्मचारी, शिक्षकों की अहम भूमिका
प्रदेश में जनगणना के लिए पांच लाख से अधिक कर्मचारियों की तैनाती होगी। पहले चरण में करीब साढ़े चार लाख प्रगणक लगाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे, जबकि 75 हजार सुपरवाइजर निगरानी करेंगे। एक प्रगणक को 30 दिन में 150 घर या करीब 800 आबादी की गणना करनी होगी।

पहले चरण में 9 हजार रुपये और दूसरे चरण में 16 हजार रुपये, यानी कुल 25 हजार रुपये। मोबाइल एचएलओ एप में आफलाइन सुविधा होगी, जिससे बिना इंटरनेट भी डेटा भरा जा सकेगा और बाद में सुरक्षित रूप से अपलोड हो जाएगा।

दूसरे चरण में पूछी जाएगी आपकी जाति:
दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित है, जिसमें घर के प्रत्येक सदस्य की उम्र, शिक्षा, रोजगार, कारोबार, दूसरे शहर में रहने की स्थिति, धर्म, जाति और भाषा जैसी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। तीसरा चरण मार्च 2027 में रिवीजन का होगा।

इसमें पहले भरी गई सूचनाओं की जांच की जाएगी और इस दौरान जन्म या मृत्यु जैसी घटनाओं को अपडेट किया जाएगा। जनगणना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में ट्रेनिंग चल रही है, जिसके बाद राज्य और जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।

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