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मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज शेड की मांग पर राजनीति तेज, हाईकोर्ट ने MMRDA से मांगा जवाब

मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज शेड की मांग पर राजनीति तेज,  हाईकोर्ट ने MMRDA से मांगा जवाब

मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अस्थायी शेड की मांग को लेकर सियासी और कानूनी घमासान छिड़ा है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने MMRDA से जवाब मांगा है, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस पर बहस हुई. इसको लेकर तमाम दलों की अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं हैं.

मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अस्थायी शेड की मांग पर सियासी घमासान छिड़ गया है. इसको लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने MMRDA से जवाब मांगा है, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस पर जमकर बहस हुई. एक पक्ष इसे मानवीय आधार पर रमजान के लिए आवश्यक मानता है, वहीं दूसरा सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों के विरोध में है. यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है.

मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की अनुमति को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के दूसरे दिन विधान भवन कर बाहर जमकर राजनीतिक बहस हुई. इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी.

कोर्ट की तरफ से होगा आखिरी फैसला
मुम्बई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ओला उबर टेक्सी और पेसेंजर के लिए रमजान के महीने में नमाज पढ़ने के लिए एक अस्थायी शेड बनाने की मांग काफी दिनों से उठ रही थी. इसी मांग को लेकर एक समूह ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में एमएमआरडीए संस्था से इस मामले में उनका जवाब मांगा है.

इस पर आज हाइकोर्ट में एमएमआरडीए अपना जवाब फ़ाइल कर सकती है, जिसके बाद अदालत ये तय करेगी कि नमाज पढ़ने के लिए अस्थाई शेड 1 महीने के लिए बनाए देने का आदेश देना है या नही देना है. क्योंकि रमजान महीना शुरू हो चुका है. यही वजह है कि इस पर जल्द ही फैसला लेना होगा.

हिंदू पक्ष कर रहा विरोध
वहीं महाराष्ट्र का विधानसभा सत्र शुरू है. इस सत्र के दौरान ये मुद्दा सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. मुस्लिम पक्ष चाहता है कि कोर्ट से ये इजाजत मिले तो वही हिन्दू पक्ष इसके खिलाफ है. मालेगांव से एमआईएम विधायक मुफ़्ती इस्माइल ने कहा कि यदि कोई नमाज़ पढ़ना चाहता है तो प्रशासन को अनुमति देनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई हनुमान चालीसा या पूजा-अर्चना करना चाहता है तो उसे भी अनुमति मिलनी चाहिए. उनका कहना था कि किसी एक धर्म के हर मुद्दे का विरोध करना उचित नहीं है.

इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए- सपा
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोर्ट में यह मांग उठी है तो इसमें गलत क्या है. उन्होंने इसे अस्थायी और समयबद्ध मांग बताते हुए कहा कि नमाज़ का समय तय होता है. इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.

पूर्व मंत्री और विधायक ने जताया विरोध
वहीं बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर ने एयरपोर्ट पर नमाज की अनुमति का विरोध किया है, उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थल पर ऐसी अनुमति क्यों दी जाए.पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोर्ट अनुमति देता है तो क्या फिर हर सार्वजनिक स्थान पर इसी तरह धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी.

मुंबई हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई
इस बीच,इस मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. अदालत ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) से पूछा है कि क्या मानवीय आधार पर छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास अस्थाई शेड में रमजान के दौरान नमाज़ की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है.

डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल रमजान के पवित्र महीने के लिए अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जाए. कोर्ट ने MMRDA से इस पर स्पष्ट बयान देने को कहा है. मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज़ की अनुमति का मुद्दा अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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