वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकों के मर्जर को लेकर खुलकर बोल चुकी है. वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को उन बड़े बैंकों की जरूरत है, जो ग्लोबल स्तर पर दुनिया के बड़े बैंकों का मुकाबला कर सके. भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI सबसे बड़ा बैंक है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकों के मर्जर को लेकर खुलकर बोल चुकी है. वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को उन बड़े बैंकों की जरूरत है, जो ग्लोबल स्तर पर दुनिया के बड़े बैंकों का मुकाबला कर सके. भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI सबसे बड़ा बैंक है. अब दो बैंकों के मर्जर से एक ऐसा बैंक बनाने की तैयारी है, जो एसबीआई के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा.
किन दो बैंकों के मर्जर की तैयारी
सरकार दो सरकारी बैंकों को मर्ज कर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बनाने की तैयार कर रही है. सरकार 25.5 करोड़ ग्राहकों वाला एक विशाल बैंक बनाने की तैयारी में है, जो एसबीआई के यूजरबेस से बस थोड़ा कम है. जिन बैंकों को मर्ज करने की तैयारी है, उनमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया का नाम शामिल है.
दो सरकारी बैंकों का विलय
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया दोनों बैंकों के मर्जर की तैयारी है. दोनों का मुख्यालय मुंबई में है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया यानी UBI और बैंक ऑफ इंडिया यानी BOI के विलय की तैयारियां सालों से चल रही है. बैंकों के घाटे को कम करने, उनका एनपीएल घटाने, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और वित्तीय तौर पर उसे और मजबूती देने के लिए इन दोनों बैंकों के मर्जर की तैयारी चल रही है.
कब होगा बैंकों का मर्जर
सरकार छोटे-छोटे बैंकों को खत्म कर बड़ा बैंक तैयार करना चाहती है, ताकि भारतीय बैंक ग्लोबल बैंकों के सामने डटकर खड़े हो सके. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के विलय से बना बैंक ज्यादा बड़ा, ज्यादा मजबूत होगा. सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर तेजी से काम हो रहा है.
विलय से क्या हासिल होगा
ये पहली बार नहीं है जब देश में बैंकों का विलय किया गया हो. इससे पहले 2017 से 2020 के बीच सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाए. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 6 बैंकों का विलय किया गया. देश में बैंकों के विलय से 27 सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 12 कर दी गई. अब सवाल ये कि बैंकों के विलय से क्या हासिल होगा ? छोटे-छोटे बैंका का विलय बड़े बैंकों में करने से बैंकों के खर्च, उसकी लागत कम हो जाती है. बैंक को चलाने में लगने वाला खर्च कम हो जाता है. बैंकों का एनपीए कम होता है. बड़े बैंकों में विलय से बेहतरीन और उन्नत तकनीक का साथ मिलता है. बड़े बैंकों की हाईटेक टेक्नोलॉजी छोटे बैंकों को मिलती है. बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा.
बैंकों के मर्जर से ग्राहकों को क्या मिलेगा ?
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के विलय का असर उसके खाताधारकों पर पड़ेगा. खाताधारकों को बेहतर सुविधा, बेहतर रिटर्न मिलेगा. हालांकि ग्राहकों के लिए थोड़े कागजी कार्रवाई भी बढ़ जाएंगे. लोगों के जमा पैसों, उसकी सेविंग, एफडी अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज दरों पर कोई असर नहीं होगा. वहीं होम लोन, कार लोन भी जस का तस रहेगा. हालांकि ब्रांच का नाम पता बदलने से पासबुक, चेकबुक, IFSC कोड आदि बदल जाएंगे. लोगों को इन चीजों के लिए बैंक के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.


