सहारनपुर/लखनऊ:उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सहारनपुर के नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने योगी सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों पर सीधा प्रहार किया। इस रैली में आकाश आनंद का एक बिल्कुल नया और तीखा राजनीतिक अंदाज देखने को मिला, जहां उन्होंने महज भावुक भाषण देने के बजाय ठोस आंकड़ों और तार्किक दलीलों के सहारे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
आकाश आनंद ने अपने संबोधन में योगी सरकार के ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के दावों पर सवाल उठाते हुए सरकारी विज्ञापनों और प्रचार-प्रसार पर हुए खर्च का मुद्दा उठाया। उन्होंने सांख्यिकीय डेटा का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने जमीनी विफलताओं को छिपाने और प्रचार करने के लिए जनता के टैक्स के 7,000 करोड़ रुपये से अधिक विज्ञापनों पर फूंक दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में हजारों सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के पद आज भी खाली पड़े हैं, जो बहुजन समाज के बच्चों के भविष्य को खोखला करने की प्रशासनिक साजिश है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में युवाओं के रोजगार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 10 हजार रुपये के मुफ्त राशन पर निर्भर बनाने से बेहतर नागरिकों को 30 हजार रुपये की सम्मानजनक सरकारी नौकरी देना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सहारनपुर की इस रैली से यह साफ संदेश गया है कि आकाश आनंद अब केवल मायावती के उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और एक सक्रिय वैचारिक चेहरे के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी को ‘भाजपा की बी-टीम’ करार देते हुए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण पर तीखा पलटवार किया और पूछा कि लोकसभा चुनाव में पूरा समर्थन मिलने के बावजूद सपा ने दो वर्षों में हाशिए के समाजों के लिए संसद में क्या किया। युवाओं को आकर्षित करने के लिए नौकरियों की कमी, कानून व्यवस्था और शिक्षा जैसे आधुनिक विषयों को अपने भाषण का मुख्य बिंदु बनाकर उन्होंने बसपा के पारंपरिक प्रचार तरीकों में एक बड़ा बदलाव पेश किया है।
इस आक्रामक और डेटा-संचालित नई शैली के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में यह यक्ष प्रश्न एक बार फिर गरमा गया है कि क्या आकाश आनंद का यह नया तेवर बसपा को सूबे की राजनीति के केंद्र में वापस ला पाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर सहारनपुर जैसी दलित-मुस्लिम बहुल सीटों पर इस रैली को मिली भारी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि पार्टी जमीनी स्तर पर विजिबिलिटी हासिल करने में सफल हो रही है। यदि आकाश आनंद आगामी दिनों में इसी निरंतरता और पैनी शैली के साथ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जनसंपर्क अभियान को आगे बढ़ाते हैं, तो इसमें कोई दोराय नहीं कि 2027 के विधानसभा चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो जाएंगे और बसपा एक बार फिर सत्ता के सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकती है।