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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे मौत मामला: अब अदालत में कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करेंगे प्रकाश आंबेडकर; हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर, एसआईटी जांच की मांग मंजूर

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे (Sahil Wakode) की मौत के मामले ने अब एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है. वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर अब इस पूरे मामले की कानूनी लड़ाई का नेतृत्व सीधे अदालत में करेंगे.

मुंबई:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे (Sahil Wakode) की मौत के मामले ने अब एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है. वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर अब इस पूरे मामले की कानूनी लड़ाई का नेतृत्व सीधे अदालत में करेंगे. इस संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका (Writ Petition) दायर की गई थी, जिसके तहत मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग को स्वीकार कर लिया गया है. प्रकाश आंबेडकर ने संस्थान में चल रहे उत्पीड़न के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘संस्थात्मक हत्या’ (Institutional Murder) करार दिया है और इसे तुरंत रोकने की मांग की है.

इस मामले को लेकर प्रकाश आंबेडकर न केवल आईआईटी बॉम्बे के भीतर होने वाले जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, बल्कि वे वहां मानसिक उत्पीड़न और छलावे का सामना कर रहे अन्य 80 छात्रों के अधिकारों के लिए भी आगे आए हैं. बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रकाश आंबेडकर द्वारा उठाई जा रही इस आवाज में केवल आरक्षित वर्ग के ही नहीं, बल्कि जनरल कैटिगरी छात्र भी शामिल हैं, जो संस्थान के प्रशासनिक और शैक्षणिक दबाव के कारण गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं. प्रकाश आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक व्यापक वैधानिक मुहिम है.

दायर रिट याचिका में मांग की गई है कि साहिल वाकोडे की मौत के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच एसआईटी द्वारा की जाए ताकि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष न्याय मिल सके. प्रकाश आंबेडकर ने राज्य सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को चेतावनी देते हुए कहा है कि देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्रों के साथ होने वाले इस तरह के व्यवहार और उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने मांग की है कि आईआईटी बॉम्बे सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े.

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