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“बाबासाहेब के विचारों को आत्मसात करें, मेहनत से लक्ष्य हासिल करें”: आईएएस डॉ. हर्षदीप कांबले

by Admin
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नागपुर में ‘प्रबुद्ध भारत’ राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का भव्य शुभारंभ; युवाओं को ‘मेहनत, मेहनत और मेहनत’ के मूलमंत्र को अपनाकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। यह प्रेरक आह्वान महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) डॉ. हर्षदीप कांबले ने किया।कल दीक्षाभूमि तक निकलेगी विशाल वॉकथॉन

नागपुर: शिक्षा परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसके बल पर ही कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है। हालांकि, सफलता प्राप्त करने के लिए केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ निरंतर मेहनत, नैतिक मूल्य और सामाजिक प्रतिबद्धता का होना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए युवाओं को ‘मेहनत, मेहनत और मेहनत’ के मूलमंत्र को अपनाकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। यह प्रेरक आह्वान महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) डॉ. हर्षदीप कांबले ने किया।

‘प्रबुद्ध भारत’ दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का उद्घाटन

यह संबोधन डॉ. कांबले ने नागपुर स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय ‘प्रबुद्ध भारत’ राष्ट्रीय कॉन्क्लेव के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि दिया।

यह भव्य सम्मेलन ‘प्रबुद्ध भारत अभियान’ और ‘आलोका ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जेन ज़ी (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) पीढ़ी के युवाओं को शिक्षा, करियर, स्वरोजगार, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास के नए अवसरों से जोड़ना तथा उनका मार्गदर्शन करना है।

कार्यक्रम में आलोका ट्रस्ट के भंते विनय रक्षित महाथेरो मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

डॉ. हर्षदीप कांबले के संबोधन एवं वक्तव्य के मुख्य बिंदु:

  1. शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक परिवर्तन:डॉ. कांबले ने कहा कि समाज को सक्षम और प्रगत बनाने के लिए उच्च शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही समाज में वास्तविक क्रांति और स्थायी सुधार ला सकती है।
  2. ज्ञान के साथ धर्म, शील और नैतिक मूल्य:शिक्षा के साथ-साथ धर्म और नैतिकता के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन में शिक्षा और दीक्षा दोनों का महत्वपूर्ण स्थान था। धर्म का सही आचरण व्यक्ति को शीलवान बनाता है। दूसरों के प्रति सम्मान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी से व्यवहार करने जैसे गुण नैतिक आचरण से ही विकसित होते हैं।
  3. प्रशासनिक दृष्टिकोण और पारदर्शिता:प्रशासनिक सेवाओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जनसामान्य की समस्याओं का त्वरित समाधान करना, पारदर्शी कार्यशैली अपनाना और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हर अधिकारी का संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है।
  4. युवाओं को मार्गदर्शन व असफलता से न डरने की सलाह:युवा पीढ़ी को प्रतियोगी परीक्षाओं, उद्यमिता (Entrepreneurship) और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष ही सफलता की नींव है। युवाओं को असफलताओं से घबराए बिना निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
  5. सामाजिक एकता और महापुरुषों की विचारधारा:महापुरुषों के विचारों पर चलने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में समता, बंधुता, न्याय और सौहार्द स्थापित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

कार्यक्रम की प्रमुख रूपरेखा एवं गतिविधियां:

  • दीप प्रज्वलन व अतिथियों का स्वागत: समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात आयोजकों ने डॉ. हर्षदीप कांबले एवं अन्य अतिथियों का शॉल, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ देकर नागरिक अभिनंदन किया।
  • प्रतिभाओं का सम्मान: समारोह के दौरान शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले होनहार विद्यार्थियों एवं समाजसेवियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
  • समारोह का समापन: कार्यक्रम का समापन आयोजक समिति द्वारा व्यक्त किए गए आभार ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ।

कल संविधान चौक से दीक्षाभूमि तक विशाल ‘वॉकथॉन’

सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार, 19 अक्टूबर को सुबह 6:30 बजे संविधान चौक से दीक्षाभूमि तक एक भव्य वॉकथॉन का आयोजन किया गया है। इस वॉकथॉन में देश भर से आए 1,000 से अधिक युवा, प्रतिनिधि और नागरिक हिस्सा लेंगे।

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