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साहिल वाकोड़े को न्याय की मांग पर पुलिसिया कार्रवाई! माता-पिता समेत कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

by Admin
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मुंबई | आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच रविवार को मुंबई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। आईआईटी बॉम्बे के गेट के पास आयोजित ‘चलो आईआईटी बॉम्बे’ प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय स्वतंत्र अनुसूचित जाति संघ (AIISCA) के संस्थापक राहुल सोनपिम्पले, महाराष्ट्र महासचिव दीपाली सालवे और साहिल के माता-पिता रवींद्र वाकोड़े तथा सोनाली वाकोड़े सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस की भूमिका और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मुंबई पुलिस पर महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट और उन्हें घसीटने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।

महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप

AIISCA की महाराष्ट्र महासचिव दीपाली सालवे ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बर व्यवहार किया। उनके अनुसार, महिला प्रदर्शनकारियों को घसीटा गया, उनके निजी अंगों को छुआ गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को मुक्के मारे और उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया।

दीपाली सालवे ने वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से साकीनाका पुलिस स्टेशन पहुंचने की अपील भी की। उनके मुताबिक, साहिल के माता-पिता को आजाद मैदान पुलिस थाने ले जाया गया, जबकि अन्य प्रदर्शनकारियों को साकीनाका, पवई और आजाद मैदान पुलिस थानों में अलग-अलग रखा गया।

दीपाली ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रत्येक हिरासत में लिए गए व्यक्ति के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। उन्होंने पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं के खिलाफ इतनी बड़ी पुलिस तैनाती क्यों की गई है और पुलिस आखिर किसकी सुरक्षा कर रही है।

ये आरोप गंभीर हैं। यदि इनकी पुष्टि होती है, तो प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

साहिल की मौत को एक महीना, परिवार अब भी न्याय की मांग पर अडिग

आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की 18 सितंबर को मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से उनका परिवार और विभिन्न सामाजिक संगठन न्याय की मांग कर रहे हैं।

साहिल के माता-पिता का आरोप है कि उनके बेटे को संस्थान में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। परिवार का कहना है कि साहिल की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

रवींद्र वाकोड़े की शिकायत के आधार पर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है, और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। परिवार ने संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे की गिरफ्तारी की भी मांग की है।

हालांकि, प्राथमिकी में आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना है।

कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं साहिल के माता-पिता

साहिल के माता-पिता पिछले कई दिनों से मुंबई के आजाद मैदान में अनशन कर रहे हैं। उनका आंदोलन इस मांग पर केंद्रित है कि बेटे की मौत के मामले में जवाबदेही तय हो और संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

परिवार को इससे पहले भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की घटनाओं का सामना करना पड़ा है। सितंबर में, कैंपस जाने की कोशिश के दौरान उन्हें भांडुप में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद 14 अक्टूबर को ‘चलो आईआईटी बॉम्बे’ के आह्वान पर राहुल सोनपिम्पले, दीपाली सालवे और अन्य अंबेडकरवादी नेताओं को भी संस्थान के बाहर हिरासत में लिया गया था।

रविवार का प्रदर्शन इसी आंदोलन की अगली कड़ी था। AIISCA ने साहिल की मौत का एक महीना पूरा होने के बाद यह प्रदर्शन आयोजित किया था। संगठन और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक हुई कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं हैं और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे।

NCP प्रवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

इस कार्रवाई पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए सवाल उठाया कि आईआईटी बॉम्बे परिसर के अंदर छात्रों को किस परिस्थिति में हिरासत में लिया जा रहा है।

इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल साहिल की मौत की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

संस्थागत जवाबदेही और विरोध के अधिकार पर उठे सवाल

साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप, दर्ज प्राथमिकी तथा न्याय की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय और जवाबदेही से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।

एक ओर परिवार अपने बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

इस पूरे मामले में तीन बिंदु महत्वपूर्ण हैं—साहिल की मौत की निष्पक्ष जांच, जातिगत भेदभाव के आरोपों की कानून के अनुसार पड़ताल और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार की जांच। इन सभी पहलुओं पर पारदर्शिता जरूरी है।

अब सवाल यह है कि साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में जांच कब ठोस नतीजे तक पहुंचेगी, परिवार की मांगों पर क्या कार्रवाई होगी और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों पर मुंबई पुलिस क्या जवाब देगी। न्याय की मांग कर रहे परिवार को स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष प्रक्रिया मिलना इस पूरे मामले में सबसे अहम है।

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