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भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी: लद्दाख बनेगा वैश्विक बौद्ध विरासत का केंद्र, शांति और सद्भाव का देगा संदेश

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नई दिल्ली: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत और विश्व शांति के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल भारत की समृद्ध बौद्ध धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा, बल्कि भगवान बुद्ध के अहिंसा, करुणा और आत्मजागरूकता के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहली बार भारत में भगवान गौतम बुद्ध के वे पवित्र अवशेष, जो अब तक अपने मूल संरक्षण स्थलों पर सुरक्षित रखे गए थे, आम लोगों के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे। इसे बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ विश्वभर के श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

1 से 15 मई तक लद्दाख में होगा भव्य आयोजन

संस्कृति मंत्रालय, लद्दाख प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (International Buddhist Confederation) के संयुक्त सहयोग से 1 से 15 मई 2026 तक लद्दाख में इस भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भारत सहित विभिन्न देशों से बौद्ध प्रतिनिधिमंडलों, आध्यात्मिक गुरुओं, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों की भागीदारी की उम्मीद है।

लद्दाख को मिलेगा वैश्विक पहचान का अवसर

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह आयोजन लद्दाख को विश्व के प्रमुख बौद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे क्षेत्र में सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लद्दाख की पहचान और अधिक सशक्त होगी।

15 दिनों तक होंगे विविध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

प्रदर्शनी के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा भव्य शोभायात्राएं, पारंपरिक बौद्ध धार्मिक अनुष्ठान, ध्यान एवं मेडिटेशन सत्र, योग शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा हिमालयी बौद्ध धर्म पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

प्रमुख स्थलों पर होंगे आयोजन

यह आयोजन महाबोधि अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्र, धर्म केंद्र, लेह पैलेस तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध स्टडीज (CIBS) जैसे प्रमुख स्थलों पर आयोजित होगा। वहीं 11 और 12 मई को कार्यक्रम का विस्तार जांस्कर तक किया जाएगा, जबकि 14 मई को लेह में भव्य समापन समारोह आयोजित होगा।

कई गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद

राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक अभिजीत हल्दर सहित अनेक गणमान्य अतिथि, बौद्ध भिक्षु और सांस्कृतिक जगत से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

भारत की बौद्ध विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की हजारों वर्षों पुरानी बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करेगी। साथ ही यह आयोजन भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानवता के सार्वभौमिक संदेश को विश्वभर में और अधिक प्रभावी ढंग से प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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