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अखिलेश के ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ बयान पर मायावती भड़कीं, सपा को बताया अहंकारी और जातिवादी

by Admin
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने तीखा हमला बोला है। मायावती ने अखिलेश यादव को अहंकारी बताते हुए कहा कि उनका यह बयान अमर्यादित राजनीतिक आचरण का उदाहरण है और इससे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का भी अपमान हुआ है।

मायावती ने अखिलेश यादव से मांग की कि वे न सिर्फ राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी, बल्कि पूरे जाट समाज से तुरंत माफी मांगें।

मायावती बोलीं— सपा का अहंकार पुराना है

शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मायावती ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सपा के अहंकारी रवैये के कारण 1993 में मुलायम सिंह यादव और बसपा का गठबंधन अधिक समय तक नहीं चल सका।

मायावती ने 2 जून 1995 के कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनके खिलाफ गंभीर षड्यंत्र रचे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के तत्कालीन नेतृत्व के रवैये ने बसपा और सपा के संबंधों को पूरी तरह बदल दिया।

अखिलेश पर भरोसा किया, लेकिन गठबंधन फिर टूट गया

मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे अपने पिता के दौर की पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएंगे। इसी भरोसे के साथ लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन हुआ था।

हालांकि, चुनावी नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं आए और कुछ समय बाद गठबंधन टूट गया। मायावती ने कहा कि इसके पीछे भी सपा का अहंकारी और स्वार्थी रवैया जिम्मेदार था।

‘काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदलती है सपा’

बसपा प्रमुख ने सपा पर अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी गठबंधन के दौरान केवल अपना राजनीतिक हित साधती है। उन्होंने कहा कि काम निकलने के बाद सपा का रवैया बदल जाता है और वह सहयोगी दलों के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने लगती है।

मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहने की अपील की।

PDA में ‘P’ के अलग-अलग मायने बताने का आरोप

मायावती ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जरूरत के अनुसार PDA में ‘P’ का अर्थ बदल दिया जाता है— कभी इसे पिछड़ों से जोड़ा जाता है तो कभी पंडितों से।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के हितों की सच्ची हितैषी नहीं रही है।

कानून-व्यवस्था को लेकर भी साधा निशाना

मायावती ने सपा सरकारों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न हुआ।

उन्होंने कहा कि सपा सरकारों में अपराधियों, माफियाओं और अराजक तत्वों को बढ़ावा मिला, जबकि आम लोगों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बनी रहीं।

बसपा ने दोहराया अंबेडकरवादी संकल्प

आगामी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से अपील की कि वे सपा को सत्ता में आने से रोकें। उन्होंने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के विचारों से कभी समझौता नहीं करेगी।

मायावती ने कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की अपनी अंबेडकरवादी नीतियों और सिद्धांतों पर मजबूती से कायम रहेगी।

क्या था ‘चवन्नी से रुपया’ वाला बयान?

17 अगस्त को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ गठबंधन ऐसे भी हुए, जिनके नेताओं को उन्होंने ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’, लेकिन वे बाद में साथ छोड़कर चले गए।

इस बयान के दो दिन बाद जयंत चौधरी ने भी पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव उन्हें इतना याद क्यों कर रहे हैं, इसका जवाब खुद अखिलेश को देना चाहिए। जयंत ने कहा कि ऐसे बयान उन लोगों को भी सोचने पर मजबूर करते हैं, जो आज समाजवादी पार्टी के साथ खड़े हैं।

अब मायावती की एंट्री के बाद अखिलेश यादव के इस बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।

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