‘जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे’ — महावितरण के आश्वासन के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
नागपुर: राज्यभर में स्मार्ट मीटर योजना को लेकर बढ़ रहे विरोध के बीच बुधवार को नागपुर में स्मार्ट मीटर विरोधी संघर्ष समिति के नेतृत्व में विशाल जनआंदोलन देखने को मिला। महावितरण के मुख्यालय पर निकाले गए इस मोर्चे में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं ने भाग लेकर स्मार्ट मीटर योजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
संघर्ष समिति के संयोजक मोहन आर्मे के नेतृत्व में निकले इस मोर्चे में कांग्रेस नेता प्रफुल्ल गुडे और अतुल लोंढे सहित कई प्रमुख सामाजिक व राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने महावितरण अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की।
उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका
संघर्ष समिति का कहना है कि स्मार्ट मीटर योजना से भविष्य में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। समिति के अनुसार, पहले से ही बढ़ते बिजली बिलों से परेशान उपभोक्ताओं की चिंताओं को सरकार और महावितरण गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसी कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और राज्यभर में विरोध तेज हो रहा है।
समिति ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं की सहमति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसलिए जनता को जागरूक करने और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यह मोर्चा निकाला गया।
महावितरण को सौंपा मांगों का ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान शिष्टमंडल ने महावितरण अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें स्मार्ट मीटर योजना को वापस लेने, उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना मीटर नहीं लगाने, बिजली बिलों में पारदर्शिता बनाए रखने, शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने जैसी मांगें शामिल थीं।
समिति का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले उनकी राय लेना आवश्यक है। साथ ही सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नई व्यवस्था से आम लोगों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।
महावितरण का आश्वासन
मोर्चे के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों और महावितरण अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, महावितरण के मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया कि नागरिकों के घरों में उनकी इच्छा के विरुद्ध जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे।
इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने कुछ हद तक संतोष व्यक्त किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से उनकी चिंताएं समाप्त नहीं हुई हैं।
आंदोलन जारी रहेगा
संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि स्मार्ट मीटर योजना को लेकर उनकी आपत्तियां अभी भी कायम हैं। इसलिए आंदोलन को समाप्त नहीं किया जाएगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
समिति के नेताओं ने दावा किया कि मोर्चे को नागपुर की जनता का व्यापक समर्थन मिला है। उनका कहना है कि यह समर्थन इस बात का संकेत है कि स्मार्ट मीटर योजना को लेकर आम नागरिकों में गहरी चिंता और असंतोष है। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में और बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की।