म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। शुक्रवार सुबह म्यांमार सेना के एक लड़ाकू विमान ने म्यांग टाउनशिप के स्वेल ले ओह गांव स्थित एक बौद्ध मठ परिसर पर हवाई हमला किया। इस हमले में तीन महिलाओं समेत 14 लोगों के मारे जाने और 20 लोगों के घायल होने की खबर है। मृतकों की संख्या स्थानीय और विपक्षी सूत्रों के आधार पर सामने आई है; सेना की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
बताया जा रहा है कि उस समय मठ में बौद्ध लेंट के दौरान आयोजित एक सप्ताह के मेडिटेशन और धार्मिक रिट्रीट में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लड़ाकू विमान ने करीब 15 मिनट के अंतर पर दो बम गिराए। पहला हमला मठ परिसर पर हुआ, जबकि दूसरा बम पास के उस घर के करीब गिरा, जहां 100 से अधिक लोग मौजूद थे। हमला होते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
लेकिन सवाल बड़ा है—बौद्ध बहुल म्यांमार में आखिर बौद्ध मठ भी सुरक्षित क्यों नहीं हैं?
इसका जवाब म्यांमार के लंबे और बेहद जटिल गृहसंघर्ष में छिपा है।
फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने तख्तापलट कर निर्वाचित सरकार को सत्ता से हटा दिया। लोकतांत्रिक नेता आंग सान सू की समेत कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआत में देशभर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन सेना की हिंसक कार्रवाई के बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे सशस्त्र प्रतिरोध और गृहयुद्ध में बदल गया।
आज म्यांमार में संघर्ष सिर्फ सेना और एक विपक्षी संगठन के बीच नहीं है। एक तरफ सैन्य शासन यानी जुंटा है, जबकि दूसरी ओर लोकतंत्र समर्थक पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज़ (PDF) और अलग-अलग जातीय सशस्त्र संगठन हैं। देश के कई हिस्सों में सेना को जमीन पर कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।
हवाई हमले क्यों बढ़े?
जमीन पर कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ कमजोर होने के बाद म्यांमार की सेना ने अपनी सबसे बड़ी सैन्य ताकत—एयर पावर—का व्यापक इस्तेमाल बढ़ाया है। सागाइंग क्षेत्र भी सेना विरोधी प्रतिरोध का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े Independent Investigative Mechanism for Myanmar की 11 अगस्त 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में सेना पर नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर हवाई हमलों का पैटर्न दर्ज करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में घरों, स्कूलों, चिकित्सा सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और विस्थापित लोगों के शिविरों पर हवाई हमलों की जांच का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार मनमानी हिरासत, यातना और यौन हिंसा के मामलों की भी जांच की जा रही है। हालांकि म्यांमार सेना लंबे समय से यह कहती रही है कि वह केवल वैध सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाती है।
मठों पर हमले का दर्दनाक सिलसिला
यह पहली घटना नहीं है जब म्यांमार के संघर्ष में कोई धार्मिक स्थल निशाना बना हो। पिछले वर्षों में भी सागाइंग और अन्य क्षेत्रों में मठों, चर्चों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जांच तंत्र का कहना है कि संघर्ष में आम नागरिकों की सुरक्षा लगातार गंभीर संकट में है।
खबर का बड़ा निष्कर्ष
स्वेल ले ओह गांव का यह हमला सिर्फ एक एयरस्ट्राइक नहीं है। यह म्यांमार के उस गहरे मानवीय संकट की तस्वीर है, जहां वर्षों से जारी संघर्ष में स्कूल, अस्पताल, गांव, धार्मिक स्थल और आम नागरिक भी युद्ध की चपेट में आ रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि म्यांमार में संघर्ष धार्मिक युद्ध नहीं है। यह मूल रूप से सेना, लोकतंत्र समर्थक ताकतों और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच सत्ता, राजनीतिक नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभुत्व का संघर्ष है। लेकिन इस संघर्ष की सबसे भारी कीमत आम नागरिक चुका रहे हैं।