Home » बारिश से धंसी ज़मीन, रायबरेली में खुला 2,000 साल पुराना इतिहास! खेत से मिले बुद्ध-महामाया की मूर्तियों के अवशेष, कुषाणकालीन सभ्यता के मिले साक्ष्य

बारिश से धंसी ज़मीन, रायबरेली में खुला 2,000 साल पुराना इतिहास! खेत से मिले बुद्ध-महामाया की मूर्तियों के अवशेष, कुषाणकालीन सभ्यता के मिले साक्ष्य

by Admin
0 comments 50 views

रायबरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में तेज बारिश के बाद एक किसान के खेत में अचानक ज़मीन धंसने से करीब 2,000 साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिलने का मामला सामने आया है। हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में बने 15 से 20 फीट गहरे गड्ढे से भगवान बुद्ध और उनकी माता महामाया की टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष, कुषाणकाल के मिट्टी के बर्तन, खिलौने, सिक्के तथा प्राचीन ईंटों से बनी दीवारें मिलने के प्रारंभिक संकेत मिले हैं। इस खोज के बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्तृत सर्वे किया है।

बारिश बनी इतिहास की खोज का कारण

हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में किसान सुशील मौर्य के खेत में लगातार बारिश के कारण अचानक ज़मीन धंस गई। करीब 15 से 20 फीट गहरा गड्ढा बनने के बाद उसके भीतर प्राचीन ईंटों से बनी दीवारें दिखाई दीं। यह देखकर किसान ने तत्काल जिला प्रशासन को सूचना दी। जानकारी मिलते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया।

पुरातत्व विभाग ने शुरू की जांच

मंगलवार को ASI के अधिकारी डॉ. राजेंद्र यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और विस्तृत जांच की सिफारिश की। इसके बाद बुधवार को राज्य पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सीढ़ी के सहारे गड्ढे में उतरकर दीवारों, मिट्टी की परतों और अन्य अवशेषों का बारीकी से अध्ययन किया। पूरे दिन चले सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

कुषाणकाल की दीवार मिलने के संकेत

जांच के दौरान टीम को प्राचीन ईंटों से बनी एक दीवार मिली, जिसे प्रारंभिक तौर पर लगभग 2,000 वर्ष पुराना और कुषाणकाल का माना जा रहा है। असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन पहली नजर में यह संरचना कुषाणकालीन प्रतीत होती है। विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही इसकी वास्तविक ऐतिहासिक महत्ता स्पष्ट हो सकेगी।

मिट्टी के बर्तन, खिलौने और सिक्के भी मिले

सर्वे के दौरान टीम को मिट्टी के प्राचीन बर्तन, खिलौने, सिक्के और अन्य पुरावशेष भी मिले हैं। इन अवशेषों से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र कभी एक विकसित प्राचीन बस्ती या सांस्कृतिक केंद्र रहा होगा।

बुद्ध और महामाया की मूर्तियों के अवशेष मिले

किसान सुशील मौर्य ने पुरातत्व विभाग की टीम को खेत से मिली भगवान बुद्ध और उनकी माता महामाया की टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष भी दिखाए। विशेषज्ञ इन मूर्तियों, मिट्टी के बर्तनों, सिक्कों और अन्य पुरावशेषों का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि उनकी आयु, शैली और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाया जा सके। यदि इनकी प्रामाणिकता की पुष्टि होती है, तो यह खोज उत्तर भारत के बौद्ध इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

1967-68 में भी हुआ था सर्वे

जानकारी के अनुसार, इस पहाड़ी क्षेत्र का सर्वे वर्ष 1967-68 में भी किया गया था, लेकिन उस समय इसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल घोषित नहीं किया गया। वर्तमान में इस भूमि पर किसान खेती कर रहे हैं और आसपास अतिक्रमण भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे उत्खनन और संरक्षण संबंधी निर्णय लिया जाएगा।

इतिहास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है खोज

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे की वैज्ञानिक खुदाई में और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलते हैं, तो रायबरेली का यह स्थल उत्तर भारत के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल हो सकता है। यह खोज कुषाणकालीन सभ्यता और बौद्ध संस्कृति के इतिहास पर नई रोशनी डाल सकती है। फिलहाल राज्य पुरातत्व विभाग अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

You may also like

Leave a Comment