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पाकिस्तान की राजनीति में फिर हलचल! क्या PM शहबाज़ शरीफ़ की होगी विदाई? संविधान में 28वें-29वें संशोधन की चर्चा तेज

by Admin
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर बड़े सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। देश के राजनीतिक और सुरक्षा गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। इसी बीच संविधान में 28वें और 29वें संशोधन लाए जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

हालांकि, इन दावों की पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। विभिन्न पत्रकारों, पूर्व अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

गृहमंत्री के बयान से बढ़ीं अटकलें

30 जुलाई को पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि “शासन-व्यवस्था चरमरा गई है।” उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया।

इसके अगले ही दिन सेना के मीडिया विंग DGISPR के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी से जब इस बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए अच्छा शासन जरूरी है।”

इन दोनों बयानों के बाद पाकिस्तान में यह चर्चा तेज हो गई कि देश में बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी चल रही है।

क्यों हो रही है नए संशोधनों की चर्चा?

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित 28वें और 29वें संवैधानिक संशोधनों का उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे, स्थानीय सरकारों और चुनावी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना हो सकता है।

बताया जा रहा है कि:

स्थानीय सरकारों को संघीय टैक्स पूल (NFC) से सीधे वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था की जा सकती है।
18वें संवैधानिक संशोधन के तहत प्रांतों को मिले कई अधिकार वापस केंद्र को सौंपे जाने पर विचार किया जा सकता है।
देश में नए छोटे प्रशासनिक प्रांत बनाए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।

हालांकि इन प्रस्तावों पर अभी तक कोई आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सुरक्षा चुनौतियों के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव

पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी उग्रवाद, खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती हिंसा तथा अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता ने सरकार और सेना दोनों पर दबाव बढ़ाया है।

इसी पृष्ठभूमि में शासन व्यवस्था में बदलाव की चर्चाओं को और बल मिला है।

राष्ट्रपति जरदारी से मुलाकात की भी चर्चा

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की। यह भी कहा जा रहा है कि न्यायपालिका में नियुक्तियों और संवैधानिक बदलावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई।

हालांकि राष्ट्रपति भवन या सरकार की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

क्या असीम मुनीर बन सकते हैं राष्ट्रपति?

पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को भविष्य में राष्ट्रपति बनाया जा सकता है, जबकि मोहसिन नकवी को प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी मिल सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार आएशा सिद्दीका समेत कुछ विश्लेषकों ने भी सोशल मीडिया पर संभावित राजनीतिक पुनर्गठन को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि यह केवल विश्लेषण और अटकलें हैं, इनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ISI बैठक को लेकर पूर्व अधिकारी का दावा

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर आदिल राजा ने दावा किया है कि ISI मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की लंबी बैठक हुई, जिसमें व्यापक राजनीतिक बदलाव पर चर्चा की गई। उनके अनुसार बैठक में असीम मुनीर को राष्ट्रपति और मोहसिन नकवी को प्रधानमंत्री बनाने की योजना पर विचार हुआ।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही पाकिस्तान की सेना या सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

फिलहाल पाकिस्तान में संवैधानिक संशोधनों, सत्ता परिवर्तन और प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। लेकिन जब तक सरकार, संसद या सेना की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इन्हें केवल राजनीतिक अटकलें और अपुष्ट दावे ही माना जाएगा।

आने वाले दिनों में यदि संविधान संशोधन संसद में पेश होते हैं या सरकार की ओर से कोई औपचारिक घोषणा की जाती है, तब पाकिस्तान की राजनीति की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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