नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET और CBSE परीक्षा पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को 32वें दिन भी जारी रहा। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का दिया आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मेदांता अस्पताल उनके उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक मेडिकल पैनल गठित करेगा, जो उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करेगा और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
यह आदेश सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर याचिका पर दिया गया। याचिका में कहा गया था कि लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
28 जून से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक 28 जून से आमरण भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या संगठन का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की लड़ाई है।
लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ती गई। 18 जुलाई को स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
जंतर-मंतर पर 32वें दिन भी जारी रहा आंदोलन
उधर, जंतर-मंतर पर CJP का धरना-प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। दोपहर तक हजारों की संख्या में छात्र, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे।
सुबह कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने आंदोलनकारियों को नाश्ता वितरित किया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौके पर पहुंची तो प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
संसद मार्च के बाद फिर जुटे आंदोलनकारी
सोमवार को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। देर शाम दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर खाली करा दिया था, लेकिन देर रात और मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र और आंदोलनकारी फिर से धरना स्थल पर पहुंच गए और आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया।
अखिलेश यादव ने लाठीचार्ज पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिससे सरकार की छवि पूरे देश में खराब हुई है।
उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों के अनुसार कई छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। अखिलेश यादव ने सवाल किया कि क्या यही “सबका साथ, सबका विकास” की नीति है।
शशि थरूर बोले- संसद से बड़ा मंच कौन-सा?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि देश, विशेषकर राजधानी दिल्ली से जुड़े इतने गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के भविष्य, पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर संसद में चर्चा नहीं होगी, तो फिर लोकतंत्र में इन मुद्दों को उठाने का उचित मंच कौन-सा होगा?
केजरीवाल का आरोप- छात्रों पर झूठी FIR दर्ज की गई
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन में घायल छात्रों से मुलाकात के बाद सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार ऐसे संदेश मिल रहे हैं जिनमें अभिभावकों का कहना है कि पुलिस कई छात्रों को हिरासत में लेकर जेल भेज रही है और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और यदि किसी छात्र के साथ अन्याय हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की दोहराई मांग
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सोमवार को सरकार का रवैया बेहद क्रूर रहा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने संसद में छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए स्थगन प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें तथा NEET और CBSE परीक्षा पेपर लीक मामलों में सरकार स्पष्ट कार्रवाई और जवाबदेही तय करे।
प्रियंका गांधी बोलीं- सरकार युवाओं की आवाज दबा रही है
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह युवा, गरीब और किसान विरोधी बन चुकी है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि जब किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं तो उन्हें दबाया जाता है और अब छात्रों की आवाज भी दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं, उनकी बात शांतिपूर्वक सुननी चाहिए, न कि उन पर बल प्रयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि पहले मंत्री किसी बड़ी घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते थे और पद छोड़ देते थे। उन्होंने 1980 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि एक रेल दुर्घटना के बाद तत्कालीन मंत्री ने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया था। आज भी ऐसी ही जवाबदेही की आवश्यकता है।
आंदोलन का मुख्य मुद्दा
CJP और आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—
NEET और CBSE सहित सभी परीक्षा पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच।
दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
छात्रों पर दर्ज मामलों की समीक्षा तथा निर्दोष छात्रों की रिहाई।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार सुनिश्चित किए जाएं।
अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के अगले निर्देशों, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और संसद में इस मुद्दे पर होने वाली संभावित चर्चा पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विमर्श का प्रमुख विषय बना रह सकता है।