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दलित छात्र साहिल वाकड़े की मौत पर न्याय की लड़ाई तेज, राहुल गांधी ने माता-पिता से की बात; IIT बॉम्बे की जवाबदेही पर सवाल

by Admin
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मुंबई: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकड़े की मौत के मामले में उनके परिवार की न्याय की लड़ाई अब और तेज हो गई है। अपने बेटे के लिए न्याय और पूरे मामले में जवाबदेही की मांग कर रहे साहिल के माता-पिता से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को वीडियो कॉल पर करीब 17 मिनट तक बातचीत की। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ हैं और न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद करेंगे।

साहिल के माता-पिता रविंद्र और सोनाली वाकड़े जब वाशिम जिले से मुंबई की ओर आ रहे थे, उसी दौरान राहुल गांधी ने उनसे बातचीत की। इस दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस प्रमुख शिवराज मोरे भी परिवार के साथ मौजूद थे।

साहिल के परिवार ने अब IIT बॉम्बे के मुख्य गेट के सामने 24 सितंबर सुबह 11 बजे से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। परिवार का कहना है कि उनके सवालों के जवाब मिलने चाहिए और उनके बेटे की मौत के मामले में निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से जवाबदेही तय होनी चाहिए।

दलित छात्र के अधिकार का सवाल क्यों महत्वपूर्ण है?

साहिल के मामले में दलित छात्र के अधिकार का सवाल भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाना सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए सिर्फ शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बराबरी के अधिकार और सामाजिक प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा मुद्दा है।

ऐसे में किसी दलित छात्र की मौत के मामले में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संस्थान ने छात्र के अधिकारों, सुरक्षा, शिकायतों और गरिमा की रक्षा के लिए क्या व्यवस्थाएं की थीं और घटना से पहले या बाद में प्रशासन ने किस तरह प्रतिक्रिया दी।

हालांकि, साहिल की मौत के पीछे किसी विशेष जातिगत भेदभाव या संस्थागत कार्रवाई को कारण मानने का निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता। यदि परिवार या किसी संगठन की ओर से ऐसे आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से होना जरूरी है।

IIT बॉम्बे की जवाबदेही पर परिवार के सवाल

साहिल के परिवार की मांग केवल आर्थिक या व्यक्तिगत सहायता तक सीमित नहीं है। परिवार यह जानना चाहता है कि उनके बेटे की मौत से पहले और बाद में संस्थान की ओर से क्या कदम उठाए गए और क्या किसी स्तर पर ऐसी चूक हुई, जिसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

यही वजह है कि IIT बॉम्बे की संस्थागत जवाबदेही इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी केवल छात्रों को शिक्षा देना नहीं होती। छात्रों के लिए सुरक्षित और भेदभाव-मुक्त वातावरण, शिकायतों की सुनवाई, सहायता व्यवस्था और किसी गंभीर परिस्थिति में समय पर संस्थागत प्रतिक्रिया भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

परिवार की भूख हड़ताल इसी जवाबदेही को लेकर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

राहुल गांधी से बातचीत के बाद बढ़ा राजनीतिक ध्यान

राहुल गांधी का साहिल के माता-पिता से सीधे संपर्क करना इस मामले को राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में भी ले आया है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि न्याय की लड़ाई में उन्हें सहायता दी जाएगी।

लेकिन राजनीतिक समर्थन से अलग मामले का न्यायिक और तथ्यात्मक निष्कर्ष जांच के आधार पर ही तय होगा। परिवार की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो और यदि किसी व्यक्ति या संस्थान की जिम्मेदारी सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जाए।

सवाल सिर्फ साहिल के परिवार का नहीं

साहिल वाकड़े की मौत ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—क्या देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में आने वाले हर छात्र को समान सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत संरक्षण मिल रहा है?

दलित, आदिवासी, पिछड़े और अन्य वंचित सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान अवसर की बहस लंबे समय से जारी है।

साहिल के मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच से ही सामने आएगा। लेकिन उनके माता-पिता की भूख हड़ताल और न्याय की मांग ने IIT बॉम्बे के सामने एक स्पष्ट सवाल जरूर रख दिया है—एक छात्र की मौत के बाद उसके परिवार को जवाब कौन देगा और संस्थागत जिम्मेदारी कहां तय होगी?

अब निगाहें IIT बॉम्बे प्रशासन और संबंधित जांच प्रक्रिया पर हैं कि परिवार की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और साहिल की मौत से जुड़े सवालों के जवाब कब तक सामने आते हैं।

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