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अब ‘पनीर’ के नाम पर नहीं बिकेगा एनालॉग प्रोडक्ट! FSSAI का बड़ा कदम, 60 दिन में मांगे सुझाव

by Admin
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नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026: पनीर खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए खाद्य नियामक FSSAI ने बड़ा कदम उठाया है। दूध से नहीं बने एनालॉग पनीर को ‘पनीर’ के नाम से बेचने और प्रचारित करने पर रोक लगाने की दिशा में FSSAI ने ड्राफ्ट नियम जारी कर दिया है। प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि ऐसे उत्पाद, जिनके घटक दूध से प्राप्त नहीं होते, उन्हें ‘पनीर’ के नाम से पेश नहीं किया जा सकेगा।

हालांकि, इसे अभी अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। FSSAI ने 60 दिनों की अवधि में आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्ति एवं सुझाव मांगे हैं। इसके बाद इन सुझावों पर विचार करके अंतिम नियम बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इसमें दूध के फैट या प्रोटीन की जगह वनस्पति तेल, फैट या वनस्पति प्रोटीन जैसे गैर-दूध घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसका रंग, आकार और बनावट पारंपरिक पनीर जैसी हो सकती है, जिसके कारण उपभोक्ता के लिए दोनों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। The Indian Express ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे ऐसे गैर-डेयरी उत्पाद के रूप में बताया है जिसमें दूध के घटकों को वनस्पति तेल, फैट और प्रोटीन से बदला जाता है।

FSSAI के ड्राफ्ट में क्या प्रस्ताव है?

FSSAI की 22 सितंबर 2026 की ड्राफ्ट अधिसूचना में Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक, “paneer made of constituents not derived from milk” यानी दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने पनीर को नियमों में प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाले उत्पाद भी अपने नाम, लेबल या मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल जारी नहीं रख सकेंगे।

यानी अगर कोई उत्पाद असल में दूध से बना पनीर नहीं है, तो उसके पैकेट, नाम या प्रचार में सिर्फ ‘Paneer’ लिखकर उसे पारंपरिक पनीर जैसा प्रस्तुत करना मुश्किल हो जाएगा।

अभी सिर्फ ड्राफ्ट है, अंतिम प्रतिबंध नहीं

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि FSSAI का यह कदम अभी प्रस्ताव के स्तर पर है।

FSSAI ने ड्राफ्ट को सार्वजनिक करते हुए संबंधित लोगों से 60 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। प्राप्त टिप्पणियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम लागू किए जाएंगे। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि देश में एनालॉग पनीर की बिक्री पूरी तरह तत्काल बंद हो गई है।

FSSAI पहले भी उठा चुका है सवाल

एनालॉग डेयरी उत्पादों की लेबलिंग को लेकर FSSAI की चिंता नई नहीं है। अप्रैल 2025 में नियामक ने ‘Analogue in Dairy Context’ के अनुपालन को लेकर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। उस परामर्श में यह विचार भी रखा गया था कि ऐसे उत्पादों की पहचान उपभोक्ताओं के सामने स्पष्ट रूप से होनी चाहिए।

इसके बाद अप्रैल 2026 में FSSAI के पश्चिमी क्षेत्र ने cheese analogue को ‘paneer’ के रूप में बेचने को कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए केंद्रीय लाइसेंस वाले निर्माताओं और फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को उचित नामकरण का निर्देश दिया था। रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों को भी ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर निगरानी और सही जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे।

महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से कार्रवाई

इस मुद्दे पर केंद्र का कदम ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में एनालॉग पनीर को लेकर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।

The Indian Express की 18 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कम से कम आठ राज्यों ने एनालॉग पनीर पर राज्य स्तर पर रोक या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। इसके बाद देशभर में एक समान नियम की जरूरत पर चर्चा तेज हुई।

उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?

अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप से लागू होता है, तो इसका सीधा असर उत्पाद के नाम और लेबलिंग पर पड़ेगा।

मसलन, कोई निर्माता दूध से बने वास्तविक पनीर के बजाय वनस्पति फैट और प्रोटीन से तैयार उत्पाद बेचता है, तो उसे सिर्फ ‘Paneer’ के नाम से बाजार में पेश करने की अनुमति नहीं होगी। उसे ऐसी पहचान देनी होगी जिससे उपभोक्ता को पता चले कि वह पारंपरिक डेयरी पनीर नहीं है।

इसका उद्देश्य यही है कि उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसकी सामग्री के बारे में उपभोक्ता को स्पष्ट जानकारी मिले। FSSAI ने अपने प्रस्ताव का उद्देश्य भी उपभोक्ता को उत्पाद की प्रकृति और संरचना को लेकर गुमराह होने से बचाना बताया है।

रेस्तरां में भी अहम असर पड़ सकता है

इस कदम का असर सिर्फ पैकेट में बिकने वाले उत्पादों तक सीमित नहीं हो सकता। FSSAI पहले ही फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को निर्देश दे चुका है कि यदि वे डेयरी एनालॉग का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी सही पहचान और जानकारी उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए।

2025 के FSSAI परामर्श दस्तावेज में रेस्तरां और कैटरिंग प्रतिष्ठानों के मेन्यू में ‘Non-dairy’ या ‘Analogue’ जैसे शब्दों के जरिए इस्तेमाल किए गए विकल्प की प्रकृति स्पष्ट करने का सुझाव दिया गया था।

सस्ता विकल्प बनाम उपभोक्ता की जानकारी

एनालॉग डेयरी उत्पादों को लेकर बहस सिर्फ नाम की नहीं है। ऐसे उत्पाद कई बार पारंपरिक डेयरी उत्पादों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होते हैं। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब उपभोक्ता को यह स्पष्ट जानकारी न मिले कि वह दूध से बना वास्तविक पनीर खरीद रहा है या दूध के स्थान पर दूसरे घटकों से तैयार एनालॉग उत्पाद।

FSSAI का मौजूदा प्रस्ताव इसी अंतर को लेबल और नाम के स्तर पर स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

क्या बदलेगा? एक नजर में

  • दूध से बना वास्तविक पनीर: ‘Paneer’ नाम का इस्तेमाल जारी रहेगा, निर्धारित मानकों के अधीन।
  • दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बना एनालॉग: प्रस्ताव के मुताबिक ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
  • पहले से लाइसेंस प्राप्त Analogue in Dairy Context उत्पाद: नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द हटाना प्रस्तावित है।
  • अभी स्थिति: अंतिम प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है; यह फिलहाल ड्राफ्ट नियम है।
  • सुझाव/आपत्ति: FSSAI ने 60 दिन का समय दिया है।

आगे क्या होगा?

अब 60 दिनों के दौरान निर्माता, कारोबारी, उपभोक्ता संगठन और अन्य संबंधित पक्ष FSSAI को अपने सुझाव या आपत्तियां भेज सकते हैं। इसके बाद नियामक इन टिप्पणियों पर विचार करेगा और प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसलिए फिलहाल बड़ा सवाल यह नहीं है कि ‘पनीर पर प्रतिबंध लग रहा है या नहीं’, बल्कि यह है कि दूध से नहीं बने पनीर जैसे उत्पादों को बाजार में किस नाम और किस लेबल के साथ बेचने की अनुमति होगी। FSSAI का मौजूदा ड्राफ्ट इसी पहचान को स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।

महाराष्ट्र में Punjab Sind Dairy के “Regular Paneer” नाम वाले उत्पाद का मामला सामने आया था। अगस्त 2026 में मुंबई के Otters Club पर FDA की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने ऐसा उत्पाद पाया, जिसे रिपोर्ट के अनुसार “Regular Paneer” (Punjab Sind Dairy) के ब्रांड नाम से रखा गया था। FDA ने इसे राज्य में प्रतिबंधित analogue paneer से जुड़ा उल्लंघन माना और क्लब के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए।

Amul Paneer: यह दूध से बना डेयरी पनीर है, analogue paneer नहीं। Amul के उत्पाद विवरण में इसकी composition में Milk Solids और Citric Acid दिए गए हैं।

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