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₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज! सरकार का नया बिल संसद में पेश, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

by Admin
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नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब तक आम लोगों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहा है। छोटी दुकान से लेकर बड़े शोरूम और सब्जी वाले से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, हर जगह UPI ने नकद लेनदेन की जगह ले ली है। लेकिन अब सरकार इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है।

केंद्र सरकार ने संसद में ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉ (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया है, जिसमें ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क (लेवी) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है कि यह शुल्क ग्राहक देगा, व्यापारी देगा या सरकार खुद वहन करेगी।

इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया है कि बड़े मूल्य के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की दिशा में विचार किया जा रहा है, लेकिन शुल्क किससे लिया जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

आखिर सरकार UPI पर शुल्क क्यों लगाना चाहती है?

UPI के जरिए हर महीने करोड़ों लोग अरबों रुपये का लेनदेन करते हैं। इस विशाल डिजिटल नेटवर्क को संचालित करने, सुरक्षित रखने और लगातार अपग्रेड करने में बैंकों, NPCI और अन्य संस्थानों पर भारी खर्च आता है। अभी तक इस लागत का बड़ा हिस्सा सरकार और बैंकिंग व्यवस्था वहन कर रही है।

सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे UPI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके लिए एक स्थायी वित्तीय मॉडल (Sustainable Funding Model) तैयार करना जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

क्या है सरकार का प्रस्ताव?

संसद में पेश किए गए बिल के अनुसार—

₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.25% से 0.40% तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
सरकार बाद में अधिसूचना जारी कर यह तय करेगी कि किन प्रकार के डिजिटल भुगतान पर शुल्क लागू होगा और किन पर नहीं।

इसका उद्देश्य छोटे लेनदेन करने वाले आम उपभोक्ताओं को राहत देना है।

सबसे बड़ा सवाल—चार्ज कौन देगा?

यही वह मुद्दा है जिस पर अभी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्तावित शुल्क का भार किस पर डाला जाएगा।

उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को चलाने की लागत पहले भी किसी न किसी रूप में वहन की जाती रही है। कई बार यह खर्च सीधे उपभोक्ता को दिखाई नहीं देता, लेकिन विभिन्न बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से उसकी भरपाई होती है।

उनके अनुसार RBI का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, तेज और मजबूत बनाना है।

क्या ग्राहकों को जेब ढीली करनी पड़ेगी?

फिलहाल इसकी संभावना स्पष्ट नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ग्राहकों पर सीधा बोझ डालने के बजाय मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) जैसी व्यवस्था अपना सकती है।

MDR वह शुल्क होता है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है। वर्तमान में कई कार्ड आधारित भुगतान पर MDR लागू है, लेकिन UPI पर इसे समाप्त रखा गया था।

अगर नई व्यवस्था लागू होती है तो संभव है कि शुल्क सीधे ग्राहक से न लेकर व्यापारी से लिया जाए। हालांकि व्यापारी चाहें तो इसकी भरपाई अपने उत्पादों की कीमतों में कर सकते हैं।

बड़े कारोबारियों पर अधिक असर पड़ सकता है

नीति निर्माताओं के स्तर पर इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि शुल्क व्यापारी के सालाना कारोबार के आधार पर तय किया जाए।

प्रस्ताव के अनुसार—

जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार ₹1.5 करोड़ से अधिक होगा, उनसे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.30% से 0.50% तक शुल्क लिया जा सकता है।
छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए अलग व्यवस्था बनाई जा सकती है।

हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम नियम जारी नहीं किए गए हैं।

कितने लोग होंगे प्रभावित?

सरकार के आंकड़ों के अनुसार—

कुल UPI ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 65% हिस्सा ₹2,000 से कम के भुगतान का है।
इसका मतलब है कि करीब 95% UPI ट्रांजेक्शन प्रस्तावित शुल्क के दायरे से बाहर रह सकते हैं।
यानी छोटे भुगतान करने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
जुलाई में बना नया रिकॉर्ड

UPI का उपयोग लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।

जुलाई 2026 में—

23.7 अरब (23.7 बिलियन) UPI ट्रांजेक्शन हुए।
कुल 29.9 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल भुगतान किया गया।

इतने बड़े स्तर पर लेनदेन होने के कारण सरकार और RBI दोनों इस डिजिटल भुगतान नेटवर्क के लिए दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था तैयार करने पर विचार कर रहे हैं।

अभी क्या है मौजूदा स्थिति?

फिलहाल UPI पर कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। संसद में पेश किया गया विधेयक अभी कानून नहीं बना है। इसके पारित होने के बाद भी सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा—

शुल्क की अंतिम दर क्या होगी।
यह किन लेनदेन पर लागू होगा।
शुल्क ग्राहक देगा, व्यापारी देगा या सरकार इसकी भरपाई करेगी।

यानी फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। अभी भी सभी UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त हैं। यदि भविष्य में कोई बदलाव होता है तो सरकार उसके लिए अलग से विस्तृत नियम और अधिसूचना जारी करेगी।

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