तेजस्वी ने बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और सरकार की कानून-व्यवस्था पर हमला किया। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी बड़ा विवाद बन गया है।
पटना। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथ मौजूद नाबालिग छात्र के साथ कथित तौर पर मारपीट और छेड़छाड़ का वीडियो सामने आने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। 19 सितंबर की शाम हुई बताई जा रही इस घटना में कुछ लोगों ने दोनों को रोककर उनके साथ अभद्रता और मारपीट की। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और कार्रवाई शुरू की।
पुलिस के अनुसार मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। पुलिस ने POCSO Act समेत संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए बिहार पुलिस से मामले में कार्रवाई और रिपोर्ट मांगी है।
तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
घटना के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने X पर लिखा कि “बिहार को बीजेपी-एनडीए ने शर्मसार किया है। सब शर्मिंदा हैं।”
तेजस्वी ने जमुई मामले को लेकर सरकार की ओर से आए बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय सम्राट चौधरी जातीय सम्मेलन कर रहे थे।
तेजस्वी ने बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और सरकार की कानून-व्यवस्था पर हमला किया। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी बड़ा विवाद बन गया है।
JDU प्रदेश अध्यक्ष के बयान से भी विवाद
जमुई मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि ऐसी “छिटपुट घटना” हो सकती है, लेकिन सरकार संवेदनशील है। उन्होंने इसके साथ 2005 से पहले के बिहार की कानून-व्यवस्था का संदर्भ दिया और कहा कि आज घटना होने पर प्रशासन कार्रवाई करता है।
इसी बयान को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटना पर तत्काल और गंभीर जवाबदेही की बात होनी चाहिए, न कि पुराने बिहार की स्थिति का हवाला देकर मौजूदा घटना का संदर्भ बदला जाए।
हालांकि, सरकार और सत्तारूढ़ दलों की ओर से घटना की निंदा की गई है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। बीजेपी की ओर से भी इसे शर्मनाक बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई, SIT गठित
जमुई पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। पीड़ितों की पहचान कर उनसे संपर्क किया गया और FIR दर्ज की गई। इसके बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया गया है। पुलिस बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी बिहार के DGP से मामले में कार्रवाई और रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने वायरल वीडियो को साझा करने से बचने और पीड़िता की निजता बनाए रखने की अपील की है।
सरकार बनाम विपक्ष: महिला सुरक्षा बना चुनावी मुद्दा
बिहार में विधानसभा चुनाव का राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है। ऐसे समय में जमुई की घटना ने महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
विपक्ष इसे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई की है और आरोपियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी।
जमुई सांसद अरुण भारती और मंत्री श्रेयशी सिंह ने भी घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल: सुरक्षा और जवाबदेही
जमुई की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए और ऐसी घटनाओं में प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और SIT मामले की जांच कर रही है। इसलिए वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली प्रत्येक बात और आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका को जांच के निष्कर्ष आने तक अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
लेकिन इतना जरूर है कि जमुई की घटना ने बिहार में महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और सरकार की कार्रवाई के साथ-साथ इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है।