प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ कथित तौर पर जातिवादी व्यवहार हुआ, तो राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने इसके खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की?
मुंबई/नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ कथित तौर पर जातिवादी व्यवहार हुआ, तो राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने इसके खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की?
प्रकाश आंबेडकर ने अपने पोस्ट में हल्द्वानी की घटना को जातिवाद और छुआछूत का निंदनीय कृत्य बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी सोच’ को एक बार फिर उजागर किया है।
‘खड़गे को अपनी ही पार्टी के सदस्यों की चुप्पी पर दुख जताना पड़ा’
प्रकाश आंबेडकर ने अपने ट्वीट में कहा कि इस पूरे मामले में इससे भी ज्यादा दुखद बात यह है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी ही कांग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा इस कथित जातिवादी कृत्य की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं किए जाने पर दुख जताना पड़ा।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल करते हुए कहा कि यदि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ कथित जातिगत भेदभाव होता है और पार्टी के बड़े नेता उस पर खुलकर आवाज नहीं उठाते, तो फिर कांग्रेस BJP-RSS की कथित मनुवादी राजनीति से किस तरह अलग है?
आंबेडकर का सवाल सीधे कांग्रेस के उस राजनीतिक दावे पर है, जिसमें पार्टी खुद को संविधान, सामाजिक न्याय और समानता की राजनीति से जोड़ती है।
‘15 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से क्या होगा?’
प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी की ओर से इस मुद्दे पर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रस्तुति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि घटना के करीब 15 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तस्वीरों के जरिए कथित ‘शुद्धिकरण’ करने वालों को एक्सपोज करने से क्या हासिल होगा?
उन्होंने अपने ट्वीट में सवाल उठाया कि इस घटना के बारे में सभी को पता है और तस्वीरें दिखाने के बजाय कार्रवाई की जरूरत है।
उनका कहना है कि यदि कांग्रेस वास्तव में इस घटना को गंभीर मानती है तो उसे आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
राहुल गांधी से सीधा सवाल- ‘FIR करवाई क्या?’
प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका का जिक्र करते हुए उनसे सीधे सवाल किया कि वे विपक्ष के नेता हैं और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देखते हैं, लेकिन जब कांग्रेस के अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़ा कथित जातिवाद का मामला सामने आया, तो उन्होंने क्या ठोस कदम उठाया?
आंबेडकर ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने इस मामले में FIR दर्ज करवाई?
उनका तर्क है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व अपने ही पार्टी अध्यक्ष के लिए मजबूती से नहीं लड़ता, तो गरीब, दलित और शोषित समाज के बीच इसका क्या संदेश जाएगा?
‘आप बोल रहे हैं खड़गे को न्याय मिलेगा, लेकिन कैसे?’
प्रकाश आंबेडकर ने राहुल गांधी के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें खड़गे को न्याय मिलने की बात कही गई।
उन्होंने पूछा कि अगर न्याय दिलाने की बात कही जा रही है तो न्याय दिलाने के लिए किया क्या जा रहा है?
आंबेडकर के मुताबिक, केवल राजनीतिक बयान, प्रेस कॉन्फ्रेंस और तस्वीरों के जरिए किसी घटना का विरोध करने के बजाय उसके खिलाफ संस्थागत और कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
उनका कहना है कि सामाजिक न्याय के सवाल पर राजनीतिक दलों की असली परीक्षा उनके बयानों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा उठाए गए ठोस कदमों से होती है।
‘Walk the Talk’ के जरिए राहुल गांधी पर निशाना
प्रकाश आंबेडकर ने अपने ट्वीट में अंग्रेजी की कहावत ‘Walk the Talk’ का उल्लेख करते हुए इसका अर्थ भी स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि व्यक्ति जो कहता है, उसे अपने कार्यों के जरिए भी साबित करे। यानी अगर कांग्रेस और राहुल गांधी जातिगत भेदभाव, सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों के मुद्दे पर गंभीर हैं, तो उन्हें इन मुद्दों पर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए।
आंबेडकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस लगातार संविधान, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों को अपने राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है।
BJP-RSS के साथ कांग्रेस की तुलना क्यों?
प्रकाश आंबेडकर ने अपने ट्वीट में कांग्रेस और BJP-RSS की राजनीतिक सोच को लेकर भी तीखा सवाल खड़ा किया।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि BJP-RSS पर जातिवादी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विरोध करती है, लेकिन कांग्रेस के भीतर ही उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ कथित जातिगत घटना पर पार्टी के बड़े नेता चुप रहते हैं, तो फिर दोनों के बीच अंतर कैसे समझाया जाएगा?
हालांकि, यह प्रकाश आंबेडकर की राजनीतिक टिप्पणी और आरोप हैं। संबंधित घटना तथा उसमें कथित रूप से शामिल लोगों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण तथ्यात्मक जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
अब कांग्रेस से कार्रवाई की मांग
प्रकाश आंबेडकर के बयान ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब मुद्दा केवल कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना और BJP-RSS पर लगाए जा रहे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया और कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है।
प्रकाश आंबेडकर का मूल सवाल यही है कि यदि कांग्रेस सामाजिक न्याय और जातिवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा करती है, तो उसे अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़े कथित जातिगत भेदभाव के मामले में ठोस कार्रवाई करके दिखानी चाहिए।
ऐसे में अब देखना होगा कि कांग्रेस इस सवाल का क्या जवाब देती है और क्या इस मामले में केवल राजनीतिक बयानबाजी जारी रहती है या फिर कोई ठोस कानूनी कदम भी उठाया जाता है।