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ईरान-अमेरिका मीटिंग से पहले इस्लामाबाद में 2 दिन की छुट्टी,ट्रम्प ने कहा – अंतिम समझौता होने तक अमेरिकी सैन्य रहेगा ईरान के आस पास

by Admin
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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले पाकिस्तान ने अचानक दो दिन की छुट्टी घोषित कर दी है. माना जा रहा है कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है. दोनों देशों के बीच सीजफायर के बाद यह बातचीत बेहद अहम है. इसके साथ ही जिस जगह यह बातचीत होगी उस सेरेने होटल को भी खाली कराया जा रहा है.

इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव के बीच अब सबकी नजर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिक गई है. यहां अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत होने वाली है. लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग से पहले पाकिस्तान ने ऐसा कदम उठाया है जिसने सबको चौंका दिया है. इस्लामाबाद प्रशासन ने अचानक गुरुवार और शुक्रवार को दो दिन की छुट्टी घोषित कर दी. यह फैसला बिना किसी स्पष्ट वजह के लिया गया, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे सुरक्षा कारण हैं. आम तौर पर जब बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता या संवेदनशील बातचीत होती है, तब ऐसे कदम उठाए जाते हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके. इतना ही नहीं पाकिस्तान के जिस सेरेना होटल में मीटिंग होने वाली है उसे भी पूरी तरह खाली करा दिया गया है.

क्या-क्या नहीं होगा बंद?
प्रशासन की तरफ से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि यह छुट्टी सिर्फ इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी में लागू होगी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जरूरी सेवाएं जैसे पुलिस, अस्पताल, बिजली और गैस सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी. लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपनी गतिविधियों की योजना इसी हिसाब से बनाएं. अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी तैयारी क्यों की जा रही है. दरअसल, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता की मेजबानी करने जा रहा है. यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच हाल ही में दो हफ्ते का सीजफायर हुआ है.

मीटिंग में कौन-कौन होंगे शामिल?
अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व करेंगे. वहीं ईरान की ओर से भी उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के आने की उम्मीद है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में यह बैठक होगी. पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने बैठक में प्रतिनिधिमंडल आने को लेकर एक्स पर पोस्ट किया था. लेकिन बाद में हटा लिया. शहबाज शरीफ ने कहा कि इस वार्ता का मकसद सिर्फ अस्थायी शांति नहीं बल्कि स्थायी समाधान निकालना है. उन्होंने इसे ‘इस्लामाबाद टॉक्स’ नाम दिया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी.

बातचीत क्यों है अहम?
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और खाड़ी देशों तक हमले फैल गए. इसके बाद लेबनान भी इस संघर्ष में शामिल हो गया, जहां हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच टकराव बढ़ गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि बड़े युद्ध का खतरा पैदा हो गया था. इसी बीच कई देशों ने मिलकर मध्यस्थता की कोशिश की. तुर्की, मिस्र और चीन ने अहम भूमिका निभाई, जबकि सऊदी अरब, कतर और अन्य देशों ने भी कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन दिया. इन प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ. लेकिन यह सीजफायर अभी भी नाजुक स्थिति में है. ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है.

अंतिम समझौता होने तक अमेरिकी सैन्य रहेगा ईरान के आस पास – ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज को घोषणा की कि सभी अमेरिकी सैन्य विमान, जहाज़ और हथियार तब तक ईरान और उसके आस-पास ही रहेंगे, जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता। लेबनान में बढ़ते तनाव के बीच, ट्रम्प ने यह भी भरोसा दिलाया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला और सुरक्षित रहेगा, और इस बीच, अमेरिकी सेना अपनी “अगली जीत” के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है।
ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा, “अमेरिका के सभी जहाज़, विमान और सैन्य कर्मी—साथ ही अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और ऐसी कोई भी अन्य चीज़ जो पहले से ही काफी कमज़ोर हो चुके दुश्मन को पूरी तरह से खत्म करने और नष्ट करने के लिए उचित और ज़रूरी है—तब तक ईरान और उसके आस-पास ही तैनात रहेंगे, जब तक कि ‘असली समझौता’ पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता।”

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