बाढ़ के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। राज्यभर में 71 राहत शिविरों में 16,500 से अधिक विस्थापित लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 30 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 72,000 से अधिक लोगों तक भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है।
गुवाहाटी: असम में बाढ़ की तबाही थमने का नाम नहीं ले रही है। लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने राज्य के कई जिलों में हालात गंभीर बना दिए हैं। पिछले 24 घंटे में तीन और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। वहीं, करीब तीन लाख लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे राहत कार्यों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
सेना का ‘ऑपरेशन जल राहत’ जारी, 1,000 से अधिक लोगों को बचाया गया
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। सेना ने बताया कि ‘ऑपरेशन जल राहत’ के तहत जवान नागरिक प्रशासन, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में लगातार राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
अब तक 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कई क्षेत्रों में नावों और अन्य संसाधनों की मदद से बचाव अभियान लगातार जारी है।
7 जिले अब भी बाढ़ की चपेट में
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य के सात जिले अब भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। इनमें शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिस्वनाथ और कामरूप (मेट्रो) शामिल हैं। इन जिलों के 551 गांव अब भी जलमग्न हैं।
सबसे अधिक प्रभावित चराइदेव जिला है, जहां 1,37,561 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके अलावा शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित हैं।
71 राहत शिविरों में हजारों लोगों ने ली शरण
बाढ़ के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। राज्यभर में 71 राहत शिविरों में 16,500 से अधिक विस्थापित लोग रह रहे हैं। इसके अलावा 30 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 72,000 से अधिक लोगों तक भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टरों, पशु चिकित्सकों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों की टीमें लगातार राहत एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
खेती और पशुधन को भारी नुकसान
बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और पशुपालन पर भी गंभीर पड़ा है। ASDMA के अनुसार:
21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है।
11,000 से अधिक मवेशी बह गए।
17,000 से अधिक पशु बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
इसके अलावा तटबंधों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, मकानों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।
भारी बारिश का नया खतरा, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट
बाढ़ की स्थिति के बीच मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए नई चेतावनी जारी की है। IMD के अनुसार 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
असम के तिनसुकिया, धेमाजी और लखीमपुर जिलों में तेज बारिश की आशंका जताई गई है। इनमें तिनसुकिया जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
वहीं, नगालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश का असर असम के चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों पर भी पड़ सकता है।
प्रशासन की अपील
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से नदी किनारे और निचले इलाकों में जाने से बचने, प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों से तुरंत संपर्क करने की अपील की है।
लगातार बारिश और मौसम विभाग की नई चेतावनी को देखते हुए आशंका है कि आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति फिर से गंभीर हो सकती है। ऐसे में राहत एवं बचाव एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।