मोबाइल ऐप छोड़िए. यूरोप में साइंटिफिक रिवोल्यूशन शुरू होता है 1550 के आसपास. तब से लेकर संविधान लागू होने तक यानी 1950 तक भारत में कोई आरक्षण नहीं था. दुनिया …
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“जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।“ “मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है।” “वे इतिहास नहीं बना सकते जो इतिहास को भूल जाते …
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भारत में हर व्यक्ति को एक ख़ास धर्म स्वीकार करने की स्वतंत्रता मिली हुई है। समानता, अभिव्यक्ति और जीने की स्वतंत्रता के अधिकारों के साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता को भी …
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*भारत में बौद्ध धर्म को पुनर्जीवन करने वाले अनागरिक धम्मपाल (धर्मपाल) (जन्म 17-09-1864 से महाप्रयाण 29-04-1933) *बचपन का नाम* – डेविड हेवावितरणे *पिता* – डान केरोलिस हेवावितरणे *माता* – मल्लिका …
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भारतीय तिरंगा ध्वज में अशोक चक्र को स्थान प्राप्त कराने का श्रेय डॉ. बाबासाहब आंबेडकर को जाता है. अर्थशास्त्र में नोबल विजेता अर्थशास्त्री प्रो.अमर्त्य सेन डॉ. बाबासाहब आंबेडकर को अपना …
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जो प्रत्येक बौद्धों के लिए जरुरी है बोधिसत्व डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर ने दीक्षा भूमि, नागपुर, भारत में ऐतिहासिक बौद्ध धर्मं में परिवर्तन के अवसर पर,14 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों …
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2007 में; OBC, SC, ST जातियोंके “बहुजन”आंदोलनकोबदलकर, “सर्वजन”कियागया।यहसहीफैसलाथा; एकसाजिशथीयाबहुतबड़ीभूल ? इसविषयपर, एकलंबीबहसछिड़चुकीहै। राष्ट्रपिता महात्मा जोतीराव फुले ने इन्हें शूद्र(जाट, सैनी, कुर्मी, पटेल, मराठा, आदि), अति-शूद्र(वाल्मीकि, चमार, पासी, धोबी, आदि) कहा …
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5 फरवरी 1951 को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संसद में ‘हिंदू कोड बिल’ पेश किया. इसका मकसद हिंदू महिलाओं को सामाजिक शोषण से आजाद कराना और पुरुषों के बराबर अधिकार …
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नरेंद्र मोदी की तो पढ़ाई-लिखाई नहीं हो पाई, वरना BJP बड़े नेताओं को ईसाई मिशनरियों ने पढ़ाया है। ईसाई मिशनरियों को सोचना चाहिए कि उन्होंने भारत को क्या दिया। आडवाणी …
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माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर पढ़िए बाबा साहब का वो ऐतिहासिक पत्र जिसमें ढेर सारा प्यार और दर्द भरा है
by Admin10 viewsइस खत में बाबा साहब ने ना सिर्फ माता रमाई के संघर्ष को बयां किया बल्कि उनके प्रति अपने अथाह प्रेम को भी ज़ाहिर किया। बाबा साहब कहते हैं ‘रमा …