ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों को लेकर जिला अदालत में बीते शुक्रवार को सुनवाई हुई थी. श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष व शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल अर्जी पर अदालत में सुनवाई हुई. अब अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का फैसला सुना दिया है.
प्रयागराजः ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. अब यौन शोषण के आरोपों के मामले में एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. एडीजे पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती तथा उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने का आदेश दिया है. कोर्ट के आदेश के बाद अब झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
बता दें, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष व शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल अर्जी पर अदालत में शुक्रवार को सुनवाई हुई थी. प्रयागराज की एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों का अदालत में वीडियोग्राफी के साथ बयान दर्ज किया था. इसके साथ ही पोक्सो कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट का भी संज्ञान में लिया था. नाबालिगों का बयान दर्ज करने और पुलिस रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने जजमेंट रिजर्व कर लिया था. अब शनिवार को अदालत ने इस मामले में फैसला भी सुना दिया है.
यह है मामला
गौरतलब है कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष व शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने 173 (4) के तहत अर्जी दाखिल की थी, जिसमें एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की गई थी. आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान 13 फरवरी को अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे. कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया और सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट के आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी. आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि उन्होंने कथित घटनाओं से संबंधित सीडी भी अदालत में सौंपी है. उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिला है और वे प्रयागराज से विद्या मठ, वाराणसी तक पैदल सनातन यात्रा निकालेंगे ताकि लोगों के सामने सच्चाई रखी जा सके.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष
वहीं, इस मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान भी सामने आया था. उन्होंने कहा था कि जब चारों शंकराचार्य बैठेंगे तब बात करेंगे. अभी तो हमारे ऊपर आरोप लगाए गए है. हम इसका प्रमाण कोर्ट में प्रस्तुत कर चुके है. दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए. दो महीने में या जल्द ही अदालत इसका फैसला करेगी. इसपर विचारण जल्द होना चाहिए. उन्होंने कहा था कि जो एक्ट मेरे ऊपर लगाया गया है, इस एक्ट में यह नियम है कि ना तो बच्चे की पहचान को उजागर किया जाए और ना ही किसी दूसरे की पहचान को सामने लाया जाए. फिर भी ऐसा किया जा रहा है. सिर्फ मुझे बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है. जनता सब समझ रही है और देख रही है. गौ माता को प्रतिष्ठा देनी होगी.
उन्होंने आगे कहा था कि हमारे हमारे ऊपर जितने भी आरोप लगाए जाएं, लेकिन हम रुकेंगे नहीं. झूठे आरोप लगाने के बावजूद हमारा मनोबल बढ़ता रहेगा. दूषित मानसिकता के चलते सिर्फ मुझे आरोप लगाकर फसाया जा रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि माता की प्रतिष्ठा की आवाज उठाने का ये खामियाजा मुझे भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि मुझ पर ऐसा आरोप लगाया गया है, जिसकी सब समाज में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं क्योंकि सांच को आंच भी नहीं.


