महाराष्ट्र के जिला परिषद चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक दिशा बदल दी है. अजित पवार के निधन के बाद उपजी सहानुभूति की लहर के चलते उनकी एनसीपी 12 जिला परिषदों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी 225 सीटों के साथ शीर्ष पर रही है.
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र के जिला परिषद चुनावों में राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है. उनकी NCP ने 12 जिला परिषदों दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है. सहानुभूति की लहर के दम पर अजित पवार गुट की NCP ने पूरे राज्य में 172 सीटें जीती हैं, जिससे विशेष रूप से पुणे जिले और पश्चिमी महाराष्ट्र के हिस्सों में पार्टी का प्रभाव बढ़ता दिख रहा है.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 12 जिला परिषदों में हुए चुनावों में 225 सीटें जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 162 सीटें मिली कांग्रेस को 55 सीटें, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 46 सीटें और एनसीपी के शरद पवार गुट को राज्य भर में 21 सीटें मिली हैं.
पुणे में NCP का जबरदस्त प्रदर्शन
पश्चिमी महाराष्ट्र में एनसीपी के प्रति मतदाताओं की सहानुभूति साफ देखी गई. पुणे जिला परिषद की 73 सीटों में से अजित पवार की एनसीपी ने अकेले 51 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि पिछली बार ये आंकड़ा 43 था. वहीं, शरद पवार गुट को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा और बीजेपी के खाते में 10 सीटें आईं. पार्टी नेताओं चुनाव प्रचार के दौरान अजित दादा को श्रद्धांजलि देने की जो अपील की थी, उसने पुणे और सतारा जैसे गढ़ों में मतदाताओं को लामबंद करने में बड़ी भूमिका निभाई.


