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स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष ,14 दिन पहले देना होगा लिखित नोटिस

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष ,14 दिन पहले देना होगा लिखित नोटिस

बजट सत्र के 9 वें दिन लोकसभा की कार्यवाही केवल 13 मिनट ही चल पाई। विपक्ष सदन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने देने की मांग कर रहा है।

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि 1 घंटा पहले स्पीकर के पास हम गए, स्पीकर ने हमें कमिट किया कि मुझे बजट डिस्कशन से पहले बोलने दिए जाएगा, आप मुझे बोलने नहीं दे रही हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप मुझे बोलने देंगी या नहीं।

3 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो आसंदी (स्पीकर की चेयर) पर संध्या राय (भाजपा सांसद) बैठी थीं।

राहुल की बात के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मैं भी स्पीकर के केबिन में मौजूद था। ऐसा कोई कमिटनमेंट नहीं किया गया। संध्या ने राहुल से कहा कि आपकी तरफ से किसी और मुद्दे के लिए कोई नोटिस नहीं आया है, बजट पर चर्चा करनी हो तो बताएं।

इसके बाद विपक्ष ने हंगामा किया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

वहीं, विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। यह प्रस्ताव पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। इसके लिए सदन में 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना होता है।

ज्ञात हो कि लोकसभा ने गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक जवाब के पास कर दिया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ। साथ ही खुलासा हुआ कि कांग्रेस ने पीएम मोदी पर शारीरिक हमले की योजना बनाई थी, जिसमें महिला सांसद उन्हें काटने वाली थीं ऐसा भी आरोप लगाया गया। .. विपक्ष इस आरोप का खुलासा सर्कार से चाहती थी इसलिए राहुल गाँधी को बोलने देने की मांग विपक्ष की और से की गयी थी।

संसद में नहीं पूछे जा सकेंगे PM केयर फंड से जुड़े सवाल
संसद में PM केयर फंड, PM राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे” – ये निर्देश सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को दिए हैं ऐसा आरोप कांग्रेस ने लगाया है , x पर पोस्ट शेयर करते हुए कांग्रेस पक्ष की ओर से कहा गया है कि
PMO ने लोकसभा सचिवालय से कहा है- इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि संसद में कोई भी सदस्य इन फंड्स पर सवाल न उठाए।
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि

  • सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं, उन्हें जनहित के सवाल पूछने से क्यों रोका जा रहा है?
  • मोदी सरकार जनता के लाखों-करोड़ रुपये का हिसाब क्यों नहीं देना चाहती?
  • आखिर मोदी सरकार देश की जनता से क्या छिपाना चाह रही है?
  • क्या अब देश की संसद नरेंद्र मोदी की मनमर्जी से चलेगी?
    विपक्ष ने कहा कि ये सीधे तौर पर तानाशाही है। संसद का अपमान है और सांसदों के अधिकारों पर हमला है।

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