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ओडिशा डायमंड ट्रायंगल UNESCO: वर्ल्ड हेरिटेज बनने के एक कदम और करीब

ओडिशा डायमंड ट्रायंगल UNESCO: वर्ल्ड हेरिटेज बनने के एक कदम और करीब

भुवनेश्वर : ओडिशा की मशहूर बौद्ध विरासत ने वैश्विक पहचान की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. जाजपुर जिले के रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि के ऐतिहासिक स्थल, जिन्हें मिलकर “डायमंड ट्रायंगल” कहा जाता है, इसको UNESCO की भारत की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है. इन्हें वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा.

UNESCO के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर ने 22 दिसंबर 2025 को भारत की ओर से जरूरी दस्तावेज जमा होने के बाद इसकी पुष्टि की. यह प्रस्ताव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तैयार किया था, जिसे UNESCO में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा के जरिए भेजा गया. यह प्रस्ताव सभी जरूरी गाइडलाइंस पर खरा उतरा है.

डायमंड ट्रायंगल को बौद्ध धर्म के तीनों प्रमुख संप्रदायों हीनयान, महायान और वज्रयान के प्रसार में इसकी अहम भूमिका के लिए जाना जाता है. जानकारों के अनुसार, ये स्थल कभी शिक्षा और आध्यात्मिक साधना के बड़े केंद्र थे. इनका संबंध ओडिशा को एशिया की व्यापक बौद्ध परंपराओं से जोड़ता है.

टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में नामांकन से पहले का जरूरी चरण होता है. अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और ओडिशा में हेरिटेज टूरिज्म, रिसर्च और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

ओडिशा के लिए यह उपलब्धि उसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है और दुनिया के सामने अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत को पेश करने का अवसर देती है.

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