कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान का फैसला किया है. इस पर भाजपा ने विरोध जताया है. वहीं सरकार का कहना है कि चुनाव में विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है.
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की जगह पारंपरिक बैलेट पेपर से मतदान कराने का फैसला किया है. इससे राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है. राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने हाल ही में घोषणा की है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के तहत आने वाली पांच शहर निगमों के चुनाव मई 2026 के बाद बैलेट पेपर से होंगे, न कि ईवीएम से. यह फैसला कांग्रेस सरकार की सिफारिश पर आधारित है, जिसने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर को पारदर्शी और भरोसेमंद बताया है.
विपक्षी भाजपा इस कदम से आग बबूला है. विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने इसे पूर्ण अपमान करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने खुद एक सर्वे करवाया था, जिसमें जनता की ईवीएम पर भारी विश्वास दिखा, लेकिन राजनीतिक डर से कांग्रेस ने बैलेट पेपर चुना. अशोक ने कहा कि बेंगलुरु भारत की आईटी राजधानी है और यहां ईवीएम बनाने वाली कंपनी बीईएल का मुख्यालय है. फिर भी कांग्रेस संस्थाओं को कमजोर करने और चुनावों से पहले पारदर्शिता व तकनीक से डरने की कोशिश कर रही है. यह मतदाताओं की बुद्धि का अपमान है.
राज्य सरकार ने कही ये बात
उन्होंने कांग्रेस पर ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बनाने का भी आरोप लगाया. इस पर तीखा पलटवार करते हुए कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने भाजपा की आलोचना को खारिज किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान जैसी कई उन्नत लोकतंत्र अभी भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं, जहां मजबूत ऑडिट सिस्टम हैं. खड़गे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने ही ईवीएम को दक्षता बढ़ाने के लिए पेश किया था, लेकिन भाजपा ने उन्हें हथियार बना लिया. उन्होंने कहा कि ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बनाकर चुनावों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
खड़गे ने आगे बताया कि कर्नाटक सरकार ने चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) को पत्र लिखकर ईवीएम का एथिकल हैकाथॉन कराने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया. उन्होंने ईसीआई से पारदर्शी ऑडिट की मांग की. यह विवाद कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम विरोधी मुहिम का हिस्सा लगता है, जहां राहुल गांधी वोट चोरी के आरोप लगाते रहे हैं.
कर्नाटक कैबिनेट ने पिछले साल ही राज्य चुनाव आयोग को बैलेट पेपर की सिफारिश की थी. आयोग ने स्पष्ट किया कि कानून दोनों विकल्पों की अनुमति देता है और उन्होंने स्वतंत्र अध्ययन के बाद बैलेट चुना. राज्य चुनाव आयुक्त जीएस संग्रेशी ने कहा कि बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों सर्वोत्तम प्रथाएं हैं, लेकिन आयोग का फैसला अंतिम है.


