अरावली रेंज और चंडीगढ़ की सुखना झील पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि सुखना झील को और कितना सुखाओगे? सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत को झील के नुकसान का जिम्मेदार ठहराया और एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट तलब की. अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी.
नई दिल्ली. अरावली रेंज और चंडीगढ़ की ऐतिहासिक सुखना झील को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरण से जुड़े टी.एन. गोदावर्मन मामले में स्वतः संज्ञान के तहत हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सुखना झील को और कितना सुखाओगे? आपने झील को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है.
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण सुखना झील को गंभीर नुकसान पहुंचा है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि पिछली गलतियों को दोहराने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
और याचिका नहीं होनी चाहिए दाखिल: CJI
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मुद्दे पर नई याचिकाएं दाखिल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान के तहत विचाराधीन है. कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग याचिकाओं के जरिए इस मामले को उलझाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट तलब
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया कि वे सुखना झील और अरावली रेंज की मौजूदा स्थिति, अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय क्षति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की निगरानी के लिए गठित की जाने वाली हाई पावर कमेटी में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के नाम सुझाए जाएं. कोर्ट का मानना है कि बिना मजबूत और स्वतंत्र समिति के पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है.
चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी. तब तक एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट और हाई पावर कमेटी से जुड़े प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखे जाएंगे. कोर्ट की टिप्पणी से यह संकेत साफ है कि सुखना झील और अरावली रेंज के मामले में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी, और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा.


