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UPI पर चार्ज लगेगा या नहीं? नए नियमों के हर सवाल का आसान जवाब

by Admin
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UPI को लेकर नया फ्रेमवर्क सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने या पेमेंट करने पर आम लोगों को चार्ज देना होगा? सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेगा। खास तौर पर व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।

हालांकि, कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि संबंधित मर्चेंट से लिया जाएगा।

आइए, आसान सवाल-जवाब में समझते हैं नए नियमों को।

सवाल: क्या अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज लगेगा?

जवाब: नहीं।

अगर आप अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजते हैं, तो इसके लिए आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा।

इसे P2P यानी Person-to-Person पेमेंट कहा जाता है। सरकार के मुताबिक UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70 फीसदी हिस्सा P2P पेमेंट का है।

यानी आम तौर पर किसी व्यक्ति को UPI से पैसे भेजना पहले की तरह मुफ्त रहेगा।


सवाल: P2P पेमेंट क्या होती है?

जवाब: जब एक व्यक्ति सीधे दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजता है, तो इसे P2P पेमेंट कहते हैं।

उदाहरण के लिए आपने अपने दोस्त को ₹500, परिवार के सदस्य को ₹5,000 या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजे। यह P2P ट्रांजैक्शन है।

ऐसे ट्रांजैक्शन पर नए फ्रेमवर्क के तहत ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा।


सवाल: P2M पेमेंट क्या होती है?

जवाब: जब कोई व्यक्ति किसी दुकान, कारोबारी या सेवा प्रदाता को UPI से भुगतान करता है, तो उसे P2M यानी Person-to-Merchant पेमेंट कहा जाता है।

उदाहरण के तौर पर—

  • किराने की दुकान पर UPI पेमेंट
  • पेट्रोल पंप पर भुगतान
  • किसी दुकान से सामान खरीदना
  • किसी कारोबारी को डिजिटल पेमेंट करना

यहां पैसे देने वाला व्यक्ति ग्राहक है और पैसे पाने वाला मर्चेंट यानी कारोबारी।


सवाल: ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर क्या MDR लगेगा?

जवाब: नहीं।

₹2,000 तक के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा।

इसका मतलब है कि इस सीमा तक के भुगतान में ग्राहक से कोई UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा और संबंधित छोटे/सामान्य मर्चेंट पर भी MDR नहीं लगेगा।


सवाल: ₹2,000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर क्या होगा?

जवाब: ऐसे कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा।

नए फ्रेमवर्क के मुताबिक ₹2,000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR निर्धारित किया गया है।

लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक को नहीं देना है।

उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी मर्चेंट को ₹10,000 का UPI भुगतान किया, तो 0.4 फीसदी के हिसाब से MDR ₹40 होगा। यह ₹40 ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना चाहिए।


सवाल: MDR क्या होता है और इसे कौन देता है?

जवाब: MDR यानी Merchant Discount Rate, डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है।

इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए—जब कोई कारोबारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है, तो पेमेंट सिस्टम से जुड़े कुछ हिस्सेदारों के बीच इस शुल्क का बंटवारा होता है।

इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े पक्ष शामिल हो सकते हैं।

यह कोई टैक्स नहीं है और न ही ग्राहक से लिया जाने वाला अलग UPI शुल्क है।

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि MDR का बोझ ग्राहक पर न डाला जाए।


सवाल: अगर MDR 0.4 फीसदी है तो बड़ी रकम पर बहुत ज्यादा शुल्क लगेगा?

जवाब: नहीं। MDR की अधिकतम सीमा भी तय की गई है।

सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए 0.4 फीसदी MDR की दर के साथ प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है।

उदाहरण के लिए ₹75,000 के भुगतान पर 0.4 फीसदी के हिसाब से ₹300 MDR बनता है।

अगर निर्धारित नियमों के तहत ट्रांजैक्शन इससे अधिक है, तब भी MDR की अधिकतम सीमा ₹300 ही रहेगी।


सवाल: पेट्रोल, रेलवे टिकट और फोन बिल जैसे भुगतान पर क्या नियम अलग हैं?

जवाब: हां। कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था है।

₹2,000 से ज्यादा के कुछ निर्धारित सेक्टरों के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • रेलवे
  • टेलीकॉम
  • बीमा
  • ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल
  • कृषि से जुड़े इनपुट

मसलन, अगर किसी पात्र ईंधन भुगतान की राशि ₹2,000 से ज्यादा है, तो संबंधित नियम के तहत ₹5 MDR हो सकता है।

लेकिन यह ₹5 ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना है।


सवाल: क्या दुकानदार यह MDR ग्राहक से वसूल सकता है?

जवाब: सरकार के मुताबिक, नहीं।

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि मर्चेंट MDR की लागत ग्राहक पर न डालें।

यानी अगर किसी ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है, तो ग्राहक से यह कहकर अतिरिक्त रकम नहीं ली जानी चाहिए कि “UPI से पेमेंट करने पर चार्ज लगेगा।”

हालांकि, व्यवहार में कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को किस तरह संभालते हैं, इस पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।


सवाल: फिर लोगों में UPI चार्ज को लेकर डर क्यों पैदा हुआ?

जवाब: इसकी बड़ी वजह यह है कि भारत में UPI लंबे समय से आम लोगों के लिए मुफ्त डिजिटल पेमेंट माध्यम रहा है।

अब बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR की दरें तय होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि कहीं कारोबारी भविष्य में इस लागत को किसी दूसरे तरीके से ग्राहकों तक न पहुंचाएं।

मसलन, कुछ कारोबारी अपनी लागत को सामान या सेवा की कीमत में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं या नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।

हालांकि, सरकार की व्यवस्था के मुताबिक MDR सीधे ग्राहक से वसूल नहीं किया जाना है।


सवाल: क्या UPI ऐप अलग से कोई प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ चार्ज ले सकते हैं?

जवाब: सरकार ने UPI को ग्राहक के लिए मुफ्त बनाए रखने पर जोर दिया है।

नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह है कि MDR की व्यवस्था के बावजूद आम यूजर पर सीधे अतिरिक्त शुल्क का बोझ न पड़े।

इसलिए ग्राहक को UPI पेमेंट करते समय किसी अलग “UPI चार्ज” या छिपे हुए शुल्क की जानकारी मिले, तो उसे ध्यान से जांचना चाहिए।


सवाल: शेयर, म्यूचुअल फंड और स्टॉक मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट का क्या होगा?

जवाब: इनके लिए अलग MDR दर निर्धारित की गई है।

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पात्र भुगतान पर 0.02 फीसदी MDR तय किया गया है।

इसकी भी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

यह MDR भी ग्राहक से अलग से वसूल किए जाने वाला UPI चार्ज नहीं है।


सवाल: क्या छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स पर भी MDR लगेगा?

जवाब: छोटे कारोबारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान है।

स्ट्रीट वेंडर, मोहल्ले की दुकान और अन्य छोटे P2M मर्चेंट, जो QR कोड के जरिए एक महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए जीरो MDR की व्यवस्था रखी गई है।

इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर डिजिटल पेमेंट की अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं पड़ने देना है।


सवाल: क्या आम लोगों के लिए महीने में UPI ट्रांजैक्शन की कोई लिमिट तय की गई है?

जवाब: इस फ्रेमवर्क में आम लोगों के लिए कोई मासिक “फ्री UPI ट्रांजैक्शन कोटा” तय नहीं किया गया है।

यानी ऐसा नहीं है कि महीने में 20 या 50 बार UPI इस्तेमाल करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगना शुरू हो जाएगा।

हालांकि, अलग-अलग बैंक या UPI सिस्टम की अपनी ट्रांजैक्शन लिमिट हो सकती है, जिसे MDR व्यवस्था से अलग समझना चाहिए।


सवाल: आखिर कितने UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगेगा?

जवाब: सरकार के अनुमान के मुताबिक, UPI के करीब 4 फीसदी ट्रांजैक्शन ही MDR के दायरे में आएंगे।

इसका मतलब है कि करीब 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस व्यवस्था से अप्रभावित रहने का अनुमान है।

इसमें वे ट्रांजैक्शन शामिल हैं जो ₹2,000 तक हैं या छोटे मर्चेंट के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं।


सवाल: MDR से मिलने वाले पैसे का क्या होगा?

जवाब: इसका इस्तेमाल पेमेंट इकोसिस्टम को सपोर्ट करने के लिए किया जाना है।

सरकार के मुताबिक MDR से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा छोटे कारोबारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए फंड में जाएगा।

कुल MDR कलेक्शन का 5 फीसदी एक अलग फंड में दिए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ना और UPI के विस्तार को बढ़ावा देना है।


सवाल: सरकार ने यह नया फ्रेमवर्क क्यों बनाया है?

जवाब: सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य UPI सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत बनाना है।

फ्रेमवर्क में एक तरफ आम लोगों के लिए P2P UPI पेमेंट को मुफ्त रखने की बात है, वहीं दूसरी तरफ कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन से पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के लिए राजस्व का रास्ता बनाया गया है।

सरकार का कहना है कि इससे पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और खासकर ग्रामीण तथा छोटे शहरों में UPI के विस्तार में मदद मिल सकती है।


एक नजर में समझें

UPI पेमेंट का प्रकारMDRग्राहक पर अलग चार्ज?
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P)नहींनहीं
₹2,000 तक सामान्य P2Mनहींनहीं
₹2,000 से ज्यादा पात्र सामान्य मर्चेंट पेमेंट0.4% तक, अधिकतम ₹300नहीं
कुछ जरूरी सेवाएं, ₹2,000 से ज्यादा₹5 फ्लैटनहीं
म्यूचुअल फंड/सिक्योरिटीज/ब्रोकर आदि0.02%, अधिकतम ₹300नहीं
पात्र छोटे मर्चेंट, ₹1 लाख/माह तक QR प्राप्तिजीरो MDRनहीं

सबसे जरूरी बात

UPI से व्यक्ति को पैसे भेजने पर आम यूजर को कोई चार्ज नहीं देना है।
₹2,000 तक के सामान्य P2M भुगतान पर MDR नहीं है।
कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा, लेकिन उसका भुगतान मर्चेंट सिस्टम के तहत करेगा, ग्राहक से अलग UPI शुल्क के रूप में नहीं।

इसलिए नए नियम का मतलब यह नहीं है कि “अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा।” असल बदलाव मुख्य रूप से कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन की फीस व्यवस्था से जुड़ा है।

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