Home » तमिलनाडु में NEET पर फिर बड़ा फैसला, विधानसभा ने खत्म करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से किया पास; 12वीं के अंकों से मेडिकल दाखिले की मांग

तमिलनाडु में NEET पर फिर बड़ा फैसला, विधानसभा ने खत्म करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से किया पास; 12वीं के अंकों से मेडिकल दाखिले की मांग

by Admin
0 comments 28 views

राज्य सरकार का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए केवल एक केंद्रीकृत प्रतियोगी परीक्षा पर निर्भर रहने से उन विद्यार्थियों के सामने मुश्किलें पैदा होती हैं, जो सरकारी या ग्रामीण स्कूलों में पढ़ते हैं और महंगी कोचिंग की सुविधा नहीं ले पाते। तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है और इसे सामाजिक न्याय तथा राज्य के अधिकारों से जोड़कर देखता है।

चेन्नई: तमिलनाडु में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा यानी NEET को लेकर एक बार फिर सियासी और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार, 11 अगस्त को NEET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। राज्य सरकार ने केंद्र से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए NEET की जगह 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों को आधार बनाने की व्यवस्था लागू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

राज्य सरकार का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए केवल एक केंद्रीकृत प्रतियोगी परीक्षा पर निर्भर रहने से उन विद्यार्थियों के सामने मुश्किलें पैदा होती हैं, जो सरकारी या ग्रामीण स्कूलों में पढ़ते हैं और महंगी कोचिंग की सुविधा नहीं ले पाते। तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है और इसे सामाजिक न्याय तथा राज्य के अधिकारों से जोड़कर देखता है।

12वीं के अंकों को आधार बनाने की मांग

विधानसभा में पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से संबंधित कानूनों में संशोधन करने का आग्रह किया गया है, ताकि तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर चयन किया जा सके।

राज्य सरकार का तर्क है कि 12वीं की परीक्षा छात्रों के पूरे शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाती है, जबकि एक दिन होने वाली प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शन कई परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। सरकार का मानना है कि बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने से राज्य के छात्रों को अधिक समान अवसर मिल सकता है।

NEET को लेकर तमिलनाडु का पुराना विरोध

तमिलनाडु में NEET का विरोध नया नहीं है। राज्य सरकार और कई राजनीतिक दल पहले भी केंद्र से तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग कर चुके हैं। राज्य का कहना है कि उसकी स्कूली शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं, इसलिए मेडिकल दाखिले के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार विशेष रूप से ग्रामीण, गरीब और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का मुद्दा उठाती रही है। उसका दावा है कि NEET की तैयारी के लिए निजी कोचिंग पर निर्भरता बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है।

केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों का सवाल

NEET को लेकर विवाद सिर्फ परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं है। इसके पीछे शिक्षा, मेडिकल प्रवेश और राज्यों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक सवाल भी है।

देशभर में मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। ऐसे में किसी एक राज्य द्वारा अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने के लिए केंद्रीय कानूनों में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। यही वजह है कि तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव पारित होना अंतिम रूप से NEET खत्म होने का फैसला नहीं है, बल्कि केंद्र के सामने राज्य की मांग को औपचारिक रूप से रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विधानसभा में सर्वसम्मति, लेकिन आगे की राह आसान नहीं

प्रस्ताव को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया। हालांकि, NEET को लेकर राजनीतिक मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। तमिलनाडु सरकार अब केंद्र से इस मांग पर विचार करने और संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह कर रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार तमिलनाडु की मांग को स्वीकार करेगा? यदि केंद्र की ओर से कानून में बदलाव नहीं किया जाता है, तो राज्य के लिए NEET से अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करना आसान नहीं होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

तमिलनाडु विधानसभा का यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश में मेडिकल प्रवेश की मौजूदा व्यवस्था और NEET की भूमिका पर फिर बहस को जन्म देता है। एक ओर NEET समर्थकों का तर्क है कि एक समान राष्ट्रीय परीक्षा से मेडिकल प्रवेश में पारदर्शिता और समान मानक सुनिश्चित होते हैं। वहीं तमिलनाडु जैसे विरोधी राज्यों का कहना है कि एक समान परीक्षा सभी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को समान रूप से नहीं देखती।

अब नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर रहेगी। यदि केंद्र इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाता है तो मेडिकल प्रवेश व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जबकि असहमति की स्थिति में तमिलनाडु और केंद्र के बीच यह मुद्दा आगे भी राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रह सकता है।

You may also like

Leave a Comment