शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश आष्टीकर शामिल हैं। इन सांसदों के पाला बदलने से शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है।
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके नौ में से छह सांसदों ने पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। सोमवार को एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा की।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश आष्टीकर शामिल हैं। इन सांसदों के पाला बदलने से शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है।
दरअसल, बीते कुछ दिनों से पार्टी में टूट की अटकलें लगाई जा रही थीं। 17 जून को शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई ने सभी सांसदों से पार्टी की अहम बैठक में शामिल होने की अपील की थी। हालांकि, बैठक में लोकसभा के केवल तीन सांसद और राज्यसभा के एक सांसद ही पहुंचे थे। बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत के अलावा लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे मौजूद रहे, जबकि बाद में शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसद बैठक से दूरी बनाए रहे।
सांसदों के शामिल होने के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि ये नेता किसी व्यक्तिगत लाभ या पद के लिए उनके साथ नहीं आए हैं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों के विकास और जनता के हित में यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “ये सभी सांसद बड़े दिल के साथ हमारे परिवार में शामिल हुए हैं। हमारा उद्देश्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करना है।”
शिंदे ने कहा कि जब उन्होंने 2022 में बगावत का फैसला किया था, तब उनके साथ 40 विधायक थे। जनता ने उनके फैसले पर भरोसा जताया और बाद के चुनावों में उनकी ताकत बढ़कर 60 विधायकों तक पहुंच गई। उन्होंने खुद को आज भी एक सामान्य कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी में हर नेता और कार्यकर्ता का सम्मान किया जाता है।
इस मौके पर एकनाथ शिंदे ने कहा, “मैं कोई भी काम आधा-अधूरा नहीं छोड़ता। ‘ऑपरेशन टाइगर’ आपके सामने सफल हुआ है।” गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को अपने खेमे में लाने की इस राजनीतिक कवायद को शिंदे गुट ने कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया था।
उधर, उद्धव ठाकरे ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘गंदी राजनीति’ करार दिया है। उन्होंने उन अटकलों को भी खारिज किया कि शिवसेना (यूबीटी) का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है। बीते शुक्रवार को शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे भावुक नजर आए और पार्टी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के सामने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश तक कर दी। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी छोड़कर गए सांसदों के आरोपों में सच्चाई है, तो वह पद छोड़ने को तैयार हैं।
मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में आयोजित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह में उद्धव ठाकरे ने पार्टी में टूट पर चिंता जताई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे, लेकिन लोकसभा के केवल तीन सांसद ही कार्यक्रम में पहुंचे थे।
छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।