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प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर बिहार सरकार तक पर उठाए सवाल, सम्राट चौधरी के बयान पर भी कसा तंज

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नई दिल्ली/पटना। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपराध और क्राइम को लेकर दिए गए बयान पर भी व्यंग्य करते हुए कहा, ”घटनाएं अपराध हैं या क्राइम, आप खुद विवेचना कर लीजिए!”

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर प्रशांत किशोर का सवाल

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिर्फ नोटिस जारी करने से कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन हो रहा था, तब भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने बिहार में करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे जाने का आरोप भी लगाया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदाता सूची, चुनाव की तारीखों, आदर्श आचार संहिता, धनबल, धर्म, जाति और मतगणना जैसे कई मुद्दों पर चुनाव आयोग की भूमिका सवालों के घेरे में है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा, क्योंकि समस्या किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़ी है।

सम्राट चौधरी के बयान पर कसा तंज

वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपराध और क्राइम को लेकर दिए गए बयान पर प्रशांत किशोर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में निशाना साधा।

उन्होंने बिहार में लगातार हो रही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अब जनता खुद ही तय कर ले कि राज्य में हो रही घटनाएं अपराध हैं या क्राइम।

प्रशांत किशोर ने समस्तीपुर समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में सामने आ रही घटनाओं को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके इस बयान को मुख्यमंत्री के अपराध संबंधी बयान पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है।

संवैधानिक संस्थाओं और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज

प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शीर्ष अदालत समय रहते अधिक सतर्कता दिखाती, तो चुनाव आयोग की स्थिति ऐसी नहीं होती।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट संविधान का संरक्षक है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि जरूरी मामलों में प्रभावी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

अब एक तरफ चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर प्रशांत किशोर के आरोप चर्चा में हैं, तो दूसरी तरफ बिहार की कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर उनका तंज राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

नोट: चुनाव में धनबल के इस्तेमाल और चुनाव आयोग की पक्षधरता से जुड़े आरोप प्रशांत किशोर के दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

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