Home » शिक्षक भर्ती पर रोक असंवैधानिक, हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

शिक्षक भर्ती पर रोक असंवैधानिक, हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

by Admin
0 comments 35 views

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि राज्य के कई सरकारी और अनुदानित विद्यालयों में हजारों शिक्षक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात (PTR) भी निर्धारित मानकों से काफी नीचे पहुंच गया है। याचिका में कहा गया कि शिक्षक भर्ती नहीं होने से विद्यार्थियों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

नागपुर: महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल आर्थिक कारणों का हवाला देकर शिक्षक भर्ती को अनिश्चितकाल तक रोकना संविधान और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की भावना के विपरीत है। सरकार का दायित्व है कि वह सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों को समय पर भरकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि राज्य के कई सरकारी और अनुदानित विद्यालयों में हजारों शिक्षक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात (PTR) भी निर्धारित मानकों से काफी नीचे पहुंच गया है। याचिका में कहा गया कि शिक्षक भर्ती नहीं होने से विद्यार्थियों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत सरकार पर पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर भर्ती प्रक्रिया को रोके रखना पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, तब भर्ती प्रक्रिया क्यों रोकी गई है। अदालत ने सरकार को अपने निर्णय का स्पष्ट कारण बताने के साथ यह भी निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की समय-सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था में केवल बजट या वित्तीय संकट का हवाला देकर आवश्यक नियुक्तियों को टालना स्वीकार्य नहीं है। यदि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस मामले पर हजारों डी.एड. और बी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं, जिन्हें लंबे समय से शिक्षक भर्ती शुरू होने का इंतजार है।

You may also like

Leave a Comment