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विश्व शांति का संदेश लेकर सारनाथ पहुंचे अमेरिकी भिक्षु, ‘आलोका’ बना आकर्षण का केंद्र

by Admin
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विश्व शांति और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले वियतनाम मूल के अमेरिकन बौद्ध भिक्षु भिक्षु पन्नाकारा बुधवार को सारनाथ पहुंचे। उनके साथ दो बौद्ध धम्म गुरु और एक भारतीय स्ट्रीट डॉग ‘आलोका’ भी था, जो पूरे कार्यक्रम में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

सारनाथ (वाराणसी): विश्व शांति और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले वियतनाम मूल के अमेरिकन बौद्ध भिक्षु भिक्षु पन्नाकारा बुधवार को सारनाथ पहुंचे। उनके साथ दो बौद्ध धम्म गुरु और एक भारतीय स्ट्रीट डॉग ‘आलोका’ भी था, जो पूरे कार्यक्रम में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार में विहाराधिपति भिक्षु आर. सुमितानंद थेरो तथा धम्म लर्निंग सेंटर के संस्थापक अध्यक्ष भिक्षु चन्दिमा ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर भिक्षु पन्नाकारा ने कहा कि आज के दौर में तकनीक (टेक्नोलॉजी) स्वयं में बुरी नहीं है, लेकिन उसका उपयोग मानवता, करुणा और समाज के विकास के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को सबसे अधिक आवश्यकता शांति की है। युद्ध, हिंसा और नफरत के माहौल में भगवान बुद्ध का करुणा और मैत्री का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि समाज बुद्ध के बताए शील, समाधि और प्रज्ञा के मार्ग पर चले तो विश्व में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।

2300 मील से अधिक की पदयात्रा

भिक्षु चन्दिमा ने बताया कि “बुद्ध वॉक फॉर पीस” अभियान के तहत भिक्षु पन्नाकारा अब तक 2300 मील (करीब 3700 किलोमीटर) से अधिक की पदयात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा का उद्देश्य विभिन्न देशों और समुदायों के लोगों तक शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध का धम्म केवल किसी एक धर्म या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग है। इसी संदेश को लेकर पन्नाकारा लगातार पदयात्रा कर रहे हैं।

केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में दिया शांति का संदेश

सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में भिक्षु पन्नाकारा ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बुद्ध के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर करुणा, मैत्री और सह-अस्तित्व की भावना विकसित होना आवश्यक है। जब तक मनुष्य अपने भीतर शांति स्थापित नहीं करेगा, तब तक विश्व शांति संभव नहीं है।

कार्यक्रम में संस्थान की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने ‘आलोका’ के गले में शांति संदेश का स्टॉल बांधकर उसका सम्मान किया। वहीं दीपांकर ने कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी का संदेश पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम का संचालन राजेश चंद्रा ने किया।

‘आलोका’ की कहानी ने जीता लोगों का दिल

पूरे कार्यक्रम में भारतीय स्ट्रीट डॉग ‘आलोका’ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। लोग उसके साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। भिक्षु सुमितानंद थेरो ने बताया कि जब भिक्षु पन्नाकारा कोलकाता से बोधगया की ओर पदयात्रा कर रहे थे, तब एक आवारा कुत्ता लगातार उनके पीछे-पीछे चलने लगा। कई दिनों तक साथ रहने के बाद भिक्षु ने उसे अपने साथ रख लिया और उसका नाम ‘आलोका’, अर्थात “प्रकाश” रखा।

आज आलोका केवल एक पालतू साथी नहीं, बल्कि शांति और सह-अस्तित्व का प्रतीक बन चुका है। भिक्षु पन्नाकारा जहां भी जाते हैं, आलोका उनके साथ चलता है और लोगों को यह संदेश देता है कि करुणा केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी जीवों के प्रति होनी चाहिए।

कार्यक्रम में भिक्षु शीलवंश, भिक्षु रत्नाकर, भिक्षु धर्मरत्न सहित बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। भिक्षु पन्नाकारा की यह पदयात्रा सारनाथ में बुद्ध के करुणा और विश्वबंधुत्व के संदेश को नई ऊर्जा देने वाली साबित हुई।

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