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देश के कई हिस्सों में थम गई बारिश, आखिर क्या है ‘मानसून ब्रेक’ जिसने बदल दिया मौसम?

by Admin
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देश के कई राज्यों में जहां एक ओर मानसून की तेज बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों में अचानक बारिश थमने लगी है। मौसम वैज्ञानिक इसे ‘मानसून ब्रेक’ (Monsoon Break) कह रहे हैं। इस वजह से कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक बादल लगभग गायब रह सकते हैं और बारिश की गतिविधियां काफी कमजोर पड़ सकती हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 6 से 7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। ऐसे समय में जब इस सीजन की कुल मानसूनी बारिश पहले ही औसत से कम दर्ज की गई है, यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता

गैर-सरकारी मौसम संस्था लाइव वेदर ऑफ इंडिया के संस्थापक नवदीप दहिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सैटेलाइट तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि जुलाई के दूसरे सप्ताह की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं।

उनके मुताबिक, पश्चिमी घाट से लेकर देश के अंदरूनी मानसूनी क्षेत्रों तक बादलों की मौजूदगी बेहद कम है। यहां तक कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी सामान्य से कम बादल दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 12 जुलाई का मौसम 12 अप्रैल जैसी गर्मियों की सुबह का एहसास करा रहा है। उनका अनुमान है कि 18 जुलाई से पहले मानसून में खास सुधार की संभावना नहीं है।

दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश होगी कम

स्काईमेट वेदर के प्रमुख और मौसम विशेषज्ञ महेश पहलावत के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 19-20 जुलाई तक अच्छी बारिश की संभावना बेहद कम है। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों पर पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान दिल्ली-एनसीआर का अधिकतम तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

क्या होता है ‘मानसून ब्रेक’?

महेश पहलावत बताते हैं कि मानसून ब्रेक जुलाई और अगस्त के दौरान एक-दो बार आने वाली सामान्य मौसमीय स्थिति है। इस दौरान मानसून की मुख्य वर्षा पट्टी (Monsoon Trough) उत्तर से दक्षिण की ओर खिसक जाती है। इसका असर यह होता है कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहती है।

इस दौरान:

आसमान अपेक्षाकृत साफ हो जाता है।
हवा में नमी कम हो जाती है।
तापमान बढ़ने लगता है।
बारिश की गतिविधियां लगभग थम जाती हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता

यह समय खरीफ फसलों की बुआई और शुरुआती बढ़वार का होता है। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य खरीफ फसलें काफी हद तक मानसून की नियमित बारिश पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ सकती है और खेती पर असर पड़ने की आशंका भी रहती है।

कब लौटेगी बारिश?

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, 19-20 जुलाई के आसपास मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना है। इसके बाद उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाकों में एक बार फिर अच्छी बारिश शुरू हो सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और बारिश की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

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