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ग्रेट निकोबार परियोजना रणनीतिक अनिवार्यता : रक्षा मंत्रालय का स्पष्टीकरण

by Admin
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केंद्र सरकार का यह स्पष्टीकरण कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के दौरे के कुछ हफ्तों बाद आया है, जहां उन्होंने पर्यावरणविदों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दोहराया था, जिन्होंने चेतावनी दी थी कि यह परियोजना क्षेत्र के अद्वितीय वन्यजीवों और समुद्री वातावरण को खतरे में डाल सकती है।राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा या ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए ‘झूठ’ बताया, आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य एक उद्योगपति को होटल और कसीनो बनाने के लिए फायदा पहुंचाना है।

केंद्र सरकार ने 81,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं का खंडन किया है। रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने परियोजना की आलोचना को “भौगोलिक समझ की कमी” से उपजा बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना रणनीतिक आवश्यकताओं से प्रेरित है और भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करेगी।

केंद्र सरकार का यह स्पष्टीकरण कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार द्वीप दौरे के कुछ सप्ताह बाद आया है, जहां उन्होंने पर्यावरणविदों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दोहराया था। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यह परियोजना क्षेत्र के अद्वितीय वन्यजीवों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल सकती है।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अंडमान-निकोबार में बनाए जाने वाले ग्रेट निकोबार आइलैंड परियोजना के समर्थन में केंद्र सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए दावा किया कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह बनाने की बात “झूठ” है।

साथ ही आरोप लगाया कि एक उद्योगपति को खास फायदा पहुंचाने के लिए यह परियोजना लायी गई है ताकि वह देश की इस बेशकीमती और अनोखी इकोलॉजिकल जमीन पर होटल और कसीनो बना सके। इस परियोजना का पूरी ताकत से विरोध करने का एलान करते हुए राहुल गांधी ने शुक्रवार को इसके खिलाफ ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत भी की।

ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के जंगलों के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि वहां के पेड़ “याद से भी पुराने” हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये जंगल पीढ़ियों से पोषित हुए हैं और द्वीप पर रहने वाले “सुंदर” लोगों को “उनका हक छीना जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा सरकार इसे ‘परियोजना’ कहती है। मैंने जो देखा है, वह परियोजना नहीं है। ये लाखों पेड़ हैं जिन्हें काटने के लिए चिह्नित किया गया है। ये 160 वर्ग किलोमीटर का वर्षावन है जो नष्ट होने की कगार पर है। ये वे समुदाय हैं जिनकी अनदेखी की गई है जबकि उनके घर छीन लिए गए हैं,” ।

इस विवाद के केंद्र में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा इस विशाल अवसंरचना परियोजना को दी गई मंजूरी है, जिसे कांग्रेस ने पहले “अधूरा” और “गलत तरीके से परिकल्पित” बताया था।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के सबसे दक्षिणी छोर पर एक ट्रांसशिपमेंट और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की योजना की सोनिया गांधी ने पहले भी आलोचना की थी, जिन्होंने क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वदेशी समुदायों का हवाला देते हुए केंद्र से पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू
कांग्रेस नेता ने लोगों से ग्रेट निकोबार परियोजना के खिलाफ ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू करते हुए एक्स पोस्ट पर लोगों से मोदी सरकार को यह संदेश देने की अपील की कि ‘हम लालच के बजाय हरियाली को चुनते हैं।’ उन्होंने कहा कि अंडमान-निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं।

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