दिनभर चले भारी सियासी ड्रामे, आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर और सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी जंग के बाद देर शाम असम पुलिस ने थोड़ी राहत दी। पुलिस प्रशासन ने आशुतोष रांका, अंकित भारद्वाज, आकाश प्रेम और वरुण अग्रवाल सहित हिरासत में लिए गए सभी 30 से अधिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षित रिहा कर दिया। हालांकि, कार्यकर्ताओं की रिहाई के बावजूद पूर्व मेजर जनरल और सीजेपी नेताओं के बीच शुरू हुआ यह जुबानी विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।
गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम की राजधानी गुवाहाटी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद राज्य का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। सीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा कार्यकर्ताओं की रिहाई न होने पर ‘असम कूच’ करने की दी गई चेतावनी पर सेना के पूर्व मेजर जनरल हर्ष काकर ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सीजेपी नेता अभिजीत दीपके के प्रभाव और वजूद पर ही सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर यह दीपके हैं कौन।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब रविवार सुबह असम पुलिस ने गुवाहाटी में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका सहित पार्टी के करीब 30 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। यह सभी लोग पार्टी के क्षेत्रीय स्वयंसेवकों की एक बैठक के सिलसिले में गुवाहाटी पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं की इस धरपकड़ की खबर सामने आते ही सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने असम सरकार को खुली चुनौती देते हुए एक अल्टीमेटम जारी कर दिया। दीपके ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर हिरासत में लिए गए सदस्यों को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो वे पार्टी के अन्य साथियों के साथ असम की तरफ कूच करेंगे।

अभिजीत दीपके के इसी ट्वीट और अल्टीमेटम पर पलटवार करते हुए पूर्व मेजर जनरल हर्ष काकर मैदान में उतरे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि हम आपके असम जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि अगर अभिजीत दीपके को ऐसा लगता है कि उनके एक ट्वीट मात्र से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा घबरा जाएंगे, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। पूर्व मेजर जनरल ने तंज कसते हुए कहा कि यहां तक कि पवन खेड़ा भी भागते हुए गए थे, आखिर यह दीपके हैं कौन।
पार्टी के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, सीजेपी के स्वयंसेवकों की यह बैठक पहले अठगांव के खड़गा चौधरी रोड पर स्थित ‘असम श्री परशुराम सेवा सदन’ में आयोजित होनी थी, लेकिन आयोजकों का आरोप है कि प्रशासन के भारी दबाव के कारण ऐन वक्त पर प्रबंधन ने उनकी बुकिंग रद्द कर दी। इसके बाद मजबूरन वेन्यू बदलकर असम सचिवालय के सामने ‘चौधरी टीला’ किया गया। हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले आशुतोष रांका ने असम सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस रविवार सुबह से ही तानाशाही रवैया अपना रही थी। यह एक निजी स्थान पर होने वाली बेहद शांतिपूर्ण बैठक थी, लेकिन सरकार राज्य के बुनियादी मुद्दों पर उठने वाले सवालों से डरकर हमारी आवाज दबाना चाहती थी।
दिनभर चले भारी सियासी ड्रामे, आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर और सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी जंग के बाद देर शाम असम पुलिस ने थोड़ी राहत दी। पुलिस प्रशासन ने आशुतोष रांका, अंकित भारद्वाज, आकाश प्रेम और वरुण अग्रवाल सहित हिरासत में लिए गए सभी 30 से अधिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षित रिहा कर दिया। हालांकि, कार्यकर्ताओं की रिहाई के बावजूद पूर्व मेजर जनरल और सीजेपी नेताओं के बीच शुरू हुआ यह जुबानी विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।