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एच-1बी वीजा में कटौती की तैयारी: ट्रंप के करीबी लाए नया विधेयक, पारित हुआ तो भारत को कितना नुकसान?

by Admin
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रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने एच-1बी वीजा जारी करने पर तीन साल के लिए रोक लगाने और कार्यक्रम में सुधार करने के लिए एक विधेयक पेश किया है। इन प्रतिनिधियों का तर्क है कि एच-1बी वीजा से अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान हुआ है। सांसद एली क्रेन की ओर से प्रस्तावित एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026 का मकसद वीजा प्रणाली को फिर से शुरू करने से पहले उसमें सुधार करना और सख्त नियमों को लागू करना है।

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बीते एक वर्षों में विदेशियों के प्रवास का मुद्दा गर्माया हुआ है। आलम यह है कि ट्रंप प्रशासन न सिर्फ अवैध प्रवासियों, बल्कि अब वैध तौर पर अमेरिका में काम के लिए जाने वाले लोगों को भी निशाना बनाने में जुटा है। इसी कड़ी में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसद अमेरिकी संसद में एक विधेयक लेकर आए हैं, जिसमें उच्च-कौशल वाले दूसरे देशों के नागरिकों को अमेरिका में रहने की सुविधा देने वाले एच-1बी वीजा पर रोक लगाना प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी का यह कदम मुख्यतः भारत और चीन के नागरिकों को अमेरिका में नौकरी करने से रोकने के मकसद से लाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह कदम अगर सफल हुआ तो इसका नुकसान दूरगामी हो सकता है।

क्या है अमेरिकी संसद में लाया गया नया विधेयक: एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट, 2026?

एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट, 2026 अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एरिजोना के रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन और उनके अन्य रिपब्लिकन सहयोगियों (जैसे ब्रायन बाबिन, पॉल गोसर आदि) की तरफ से पेश किया गया एक सख्त आव्रजन (इमिग्रेशन) विधेयक है। इस विधेयक का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को सुरक्षित करना बताया गया है। इन सांसदों का दावा है कि कॉरपोरेट कंपनियां एच-1बी वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को काम पर रख रही हैं।

एच-1बी वीजा को लेकर क्या हैं इस विधेयक में प्रस्ताव
एच-1बी वीजा पर तीन साल की रोक: नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तत्काल प्रभाव से तीन साल का प्रतिबंध लगाना। इस रोक के दौरान मौजूदा एच-1बी वीजा धारकों से धीरे-धीरे अमेरिका छोड़ने की अपेक्षा की जाएगी।

वीजा सीमा में भारी कटौती: एच-1बी वीजा की सालाना कैप (सीमा) को वर्तमान 65,000 से घटाकर सिर्फ 25,000 कर दिया जाएगा।

न्यूनतम वेतन को और बढ़ाना: एच-1बी वीजा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन की सीमा को बढ़ाकर दो लाख डॉलर (लगभग 1.87 करोड़ रुपये) प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है।

आश्रितों को लाने पर पाबंदी: एच-1बी वीजा धारकों को अपने आश्रितों और जीवनसाथी को अमेरिका लाने से रोका जाएगा और इसके तहत मिलने वाले एच-4 वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन: वीजा देने की मौजूदा लॉटरी प्रणाली को खत्म करके इसकी जगह वेतन-आधारित चयन प्रणाली को लागू किया जाएगा।

ग्रीन कार्ड पर रोक: एच-1बी धारकों को अपना वीजा स्टेटस बदलकर स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने से रोक दिया जाएगा।

ओपीटी कार्यक्रम का खात्मा: अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ग्रैजुएशन पूरा होने के बाद अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) कार्यक्रम को भी खत्म करने की बात विधेयक में कही गई है।

नौकरी देने वालों के लिए कड़े नियम: नौकरी देने वाली कंपनियों को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उन्हें इस पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी नागरिक नहीं मिला है और उन्होंने कर्मचारियों की छंटनी नहीं की है।

थर्ड-पार्टी और एक से अधिक नौकरियों पर रोक: एच-1बी वीजा कर्मचारियों के एक से अधिक नौकरियां करने और थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसियों के जरिए नियुक्त होने पर प्रतिबंध लगेगा।

$100,000 की फीस को स्थायी करना: विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित 100,000 डॉलर की भारी फीस को स्थायी रूप से लागू करने का भी प्रस्ताव है।

संघीय एजेंसियों पर भी लागू होगा प्रतिबंध: अमेरिका की संघीय एजेंसियों को अप्रवासी श्रमिकों को स्पॉन्सर करने या काम पर रखने से रोका जाएगा।
विधेयक पारित हुआ तो भारत-चीन जैसे देशों पर कैसे असर पड़ेगा?

अगर अमेरिकी संसद में रखा गया एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट पारित हो जाता है, तो भारत और चीन जैसे देशों पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि एच-1बी वीजा हासिल करने वालों में 84% से 89% हिस्सा अकेले इन्हीं दोनों देशों के पेशेवरों का होता है। वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, कुल मंजूर 3,99,395 एच-1बी याचिकाओं में से 71% (करीब 2.83 लाख वीजा) सिर्फ भारतीयों को मिले थे। अगर यह विधेयक पारित होता है तो अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए एफ-1 (स्टूडेंट वीजा) से ओपीटी (छात्रों को काम करने की मंजूरी देने वाला कार्यक्रम) संकट में पड़ जाएगा। इसके अलावा एच-1बी और अंत में ग्रीन कार्ड तक पहुंचने का दशकों पुराना स्थापित मार्ग पूरी तरह से टूट जाएगा।

भारत के बाद चीनी नागरिक एच-1बी वीजा हासिल करने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर है। 2024 में लगभग 46,680 एच-1बी वीजा (11.7%) चीनी नागरिकों को आवंटित किए गए थे। रिपब्लिकन सांसदों का यह कदम विशेष रूप से विदेशी कामगारों (मुख्यतः भारतीय और चीनी नागरिकों) को हटाकर अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देने के लिए है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत और चीन के कुशल पेशेवरों के लिए अमेरिका जाकर बसने और काम करने के रास्ते को खत्म कर देगा।

विशेषज्ञों की राय

कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कड़े कदम उस दशकों पुरानी कुशल प्रवासन पाइपलाइन को पूरी तरह से नष्ट कर सकते हैं, जिस पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से निर्भर रही है।

जानकारों ने इस बात को लेकर भी आगाह किया है कि इस विधेयक के कानून बनने की राह में भारी विधायी चुनौतियां हैं। इसे अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) और सीनेट (उच्च सदन) में पास होना होगा।

अमेरिकी आव्रजन कानूनों में बदलाव के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होती है। इसमें 100 सदस्यों वाले सीनेट में 60 वोटों का विधेयक के पक्ष में होना अनिवार्य है। इसलिए, कई विशेषज्ञ इस बिल को तत्काल नीतिगत बदलाव के बजाय मह एक राजनीतिक बयानबाजी या संकेतक के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगर यह विधेयक पारित भी होता है, तो इसके अंतिम स्वरूप को काफी हद तक हल्का किया जा सकता है या लगभग पूरी तरह बदला जा सकता है।

दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञ और समूह इस बिल का पुरजोर समर्थन भी कर रहे हैं। इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट की सह-संस्थापक रोजमेरी जेन्क्स ने इसे अमेरिकी संसद में पेश किया गया अब तक का सबसे सख्त और मजबूत एच-1बी विधेयक बताया है। उनका कहना है कि एच-1बी वीजा मूल रूप से अमेरिकियों को एक शॉर्ट-टर्म वीजा के रूप में पेश किया गया था, ताकि कामगारों की अस्थायी कमी को भरा जा सके, जबकि इस बीच अमेरिकियों को उन नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। जेन्क्स के मुताबिक, यह विधेयक वीजा आवंटन को कम करके, लागत बढ़ाकर, ओपीटी को खत्म करके और तीन साल की रोक लगाकर वास्तव में अमेरिकी श्रमिकों के हितों को सबसे ऊपर रखता है।

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