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“हैप्पी दिवाली, मोदी जी, डरिए मत, सामने आइए”: राहुल गांधी का प्रधानमंत्री को लाइव डिबेट का चैलेंज, जज की कुर्सी पर मोहन भागवत को बिठाने की पेशकश

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नई दिल्ली:त्योहारों के इस सीजन में जहां पूरा देश पटाखों और मिठाइयों में व्यस्त है, वहीं देश की राजनीतिक चौपाल पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक नया ‘चैलेंज बम’ फोड़ दिया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे एक लाइव डिबेट (खुली बहस) की चुनौती दी है, और इस राजनीतिक मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए रेफरी यानी जज की कुर्सी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को सौंपने की खुली पेशकश कर डाली है। दिवाली की शुभकामनाओं के साथ आए इस तीखे न्योते ने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक का तापमान बढ़ा दिया है।

इस राजनीतिक अखाड़े की रूपरेखा तय करते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि प्रधानमंत्री जब चाहें, जहां चाहें जगह चुन लें, वे दोनों टेबल के आमने-सामने बैठेंगे। इस महा-बहस में देश का युवा और मीडिया भी मौजूद रहेगा ताकि ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ लाइव टेलीकास्ट पर हो सके। राहुल गांधी ने व्यंग्यात्मक लहजे में प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस चुनौती से डरें नहीं और राष्ट्रवाद बनाम देशद्रोह के इस नैरेटिव को हमेशा के लिए स्पष्ट करने के लिए टेबल पर आ जाएं।

बहस के एजेंडे को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कई संवेदनशील मुद्दों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है, जिसमें देश के फाइनेंशियल सिस्टम की कमियां, हालिया यूएस (US) डील की रहस्यमयी गति और कैबिनेट को बिना बताए लिए गए फैसलों पर तीखे सवाल शामिल हैं। इसके साथ ही, उद्योगपति अडानी के मामलों के बंद होने और वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘एपस्टीन’ (Epstein) जैसे विवादित मुद्दों पर भी सीधे और तीखे दांव पेंच खेलने की तैयारी की गई है। राहुल गांधी का कहना है कि प्रधानमंत्री अक्सर विपक्ष पर विदेशी ताकतों से संबंध होने के आरोप लगाते हैं, तो क्यों न इस बार इसी मंच पर यह तय कर लिया जाए कि असली कनेक्शन किसका और कैसा है।

नेताओं पर चल रहे कानूनी मुकदमों पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन पर पहले से ही करीब 45 मानहानि (Defamation) के केस चल रहे हैं, लेकिन सरकार इस विदेशी कनेक्शन वाले मुद्दे पर नया मानहानि केस करने की हिम्मत नहीं दिखा रही है। दिवाली के इस मौके पर प्रधानमंत्री को दी गई इस ‘हैप्पी दिवाली’ चुनौती ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति के मंच पर पटाखों की गूंज भले ही कम हो जाए, लेकिन बयानों की आतिशबाजी थमने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि क्या सत्ता पक्ष राहुल गांधी की इस चुनौती को स्वीकार कर मोहन भागवत की अदालत में बैठने के लिए राजी होता है या इस चैलेंज को महज एक त्योहार का राजनीतिक पटाखा मानकर छोड़ दिया जाता है।

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